Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 35 of 144

Sri Govind Dev ji, Jaipur

मन में बसी बस चाह यही प्रिय नाम तुम्हारा उचारा करूं। बिठला के तुम्हें मन मंदिर में मन मोहन रूप निहारा करूं॥

08 June, 2010

Narayan Narayan Jai Jai Govind Hare – Art of Living bhajan

This video shows Art of living’s Bangalore ashram. Lyrics of bhajan: Narayan Narayan Jai Jai Govind Hare नारायण नारायण, जय जय गोविंद हरे नारायण नारायण, जय जय गोपाल हरे

31 May, 2010

Hari Sundar Nand Mukunda – Art of Living bhajan by Rishi Nityapragya

Lyrics of bhajan: Hari Sundar Mukunda, Hari Narayan Om हरि सुंदर नंद मुकुंदा हरि नारायण ॐ हरि केशव, हरि गोविंदा, हरि नारायण हरि ॐ वनमाली, मुरली धारी, गोवर्धन गिरिवर धारी नित नित कर माखन चोरी, गोपी मन भाये

31 May, 2010






Sri Banke Bihari ke sawaiya, 34 of 144, वे तो लली वृषभान लली की गली के गुलाम हैं

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Sawaiya verses are part of the rich literary heritage of Braj (Mathura-Vrindavan). They are dramatised in raslila performances. ३४. द्वार के द्वारिया पौरि के पौरिया पाहरुवा घर के घनश्याम हैं। दास के दास सखीन के सेवक पार परोसिन के धन धाम हैं॥

19 May, 2010




Aham Vishvam