हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम। राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम

लंका की ओर जाते समय हनुमान्‌जी को मैनाक पर्वत ने थोड़ी देर अपने ऊपर विश्राम करने का आमंत्रण दिया | भक्ति और कर्मनिष्ठा से भरे हुए हनुमान जी ने पर्वत को हाथ से छू कर प्रणाम किया और कहा- श्री रामचंद्रजी का काम किए बिना मुझे विश्राम कहाँ?

20 April, 2021

ध्यान क्या है और क्या हैं उसके लाभ ? - श्री श्री रवि शंकर जी

श्री श्री रवि शंकर - मन के ऊपरी सतह पर ठहराव लाना ही ध्यान है| वर्तमान क्षण में जीना ही ध्यान है| पूरी तरह से विश्राम करना ही ध्यान है| जब आप पूरी तरह से प्रसन्न होते हैं, प्रेम से ओत-प्रोत होते हैं, तब ध्यान सहज ही हो जाता है| ध्यान एक ऐसी स्थिति

25 March, 2021











लख खुशियां पादशाहियां, Guru bhajan video