Krishna bhajan – tum kaha chhupe bhagavan ho

तुम कहां छुपे भगवन हो, मधुसूदन हो, मोहन हो, कहां ढूंढू रमा रमन हो, मेरे प्यारे मनमोहन हो क्या छुपे क्षीरसागर में, या गोपिन की गागर में, या छुपे भक्त-हृदय में, मेरे प्यारे मनमोहन हो हो सांवरी सूरत वाले, इक बार दिखा दे झांकी, है कसम तुम्हें

29 April, 2011

Meera Bai Bhajan – Sakhi ree mohe laage vrinavan neeko

आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको निर्मल नीर बहत यमुना को, भोजन दूध दही को, सखी सी मोहे लागे वृन्दावन नीको  आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको रतन सिंहासन आप विराजे, मुकुट धरे तुलसी को आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको कुंजन कुंजन फिरत राधिका, शब्द

29 April, 2011


Raskhan ke dohe, Sri Banke Bihari ke sawaiya, 48 of 144

चित्र लिखी सी भई सब देह न वैन कढ़ै मुख दीन्हें दुहाई। कैसी करूं जित जाऊं तितै सब बोलि उठैं वह बांवरी आई॥४८॥ Meaning of this sawaiya verse by Raskhan My eyes have been arrested by the all attractive sight of Krishna :-) On seeing Krishna,

25 October, 2010

Braj ke dohe, sawaiya, 46 of 144

After wearing diamonds, what is the point of inspecting pieces of glass? The eyes which are blessed with your sight, have no need to see anything else anymore :-)

16 October, 2010

Sri Banke Bihari je ke sawaiya, 45 of 144

माथे किरीट बड़े दृग चंचल मंद हंसी मुखचन्द जुन्हाई। जै जग मन्दिर दीपक सुन्दर श्री व्रजदूलह ‘देव’ सहाई॥४५॥

07 October, 2010



    First day of Navratri - Devi Shailaputri