Radha Krishna lila, Sri Banke Bihari ke sawaiya, 50 of 144

५०. हेलो री मैं लख्यो आजु को खेल बखान कहां लौ करे मत मोरी। राधे के सीस पै मोर पखा मुरली लकुटी कटि में पट डोरी॥ बेनी विराजत लाल के भाल ओ चूनर रंग कसूम में बोरी। मान के मोहन बैठि रहे सो मनावति श्री वृषभान किसोरी॥५०॥

25 November, 2010


Raskhan ke dohe, Sri Banke Bihari ke sawaiya, 48 of 144

चित्र लिखी सी भई सब देह न वैन कढ़ै मुख दीन्हें दुहाई। कैसी करूं जित जाऊं तितै सब बोलि उठैं वह बांवरी आई॥४८॥ Meaning of this sawaiya verse by Raskhan My eyes have been arrested by the all attractive sight of Krishna :-) On seeing Krishna,

25 October, 2010

Braj ke dohe, sawaiya, 47 of 144, Literature from Vrindavan

‘रसखान’ विलोकत बौरी भई दृग मूंदि के ग्वाल पुकारि हंसीहै। खोलरी घूंघट खोलू कहा वह मूरति नैनन मांझ बसी है॥४७॥ Bhakti poet, Raskhan says: ‘Krishna is so attractive…He has a peacock feather tucked in his turban. His face is powdered with dust that

16 October, 2010

Braj ke dohe, sawaiya, 46 of 144

After wearing diamonds, what is the point of inspecting pieces of glass? The eyes which are blessed with your sight, have no need to see anything else anymore :-)

16 October, 2010


Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 41 of 144

पाऊं कहां हरि हाय तुम्हें, धरनी में धंसूं कि अकाशहिं चीरूं॥

30 June, 2010


Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 38 of 144, Prayer to Krishna

ऐसी करा नव लाल रंगीले जू चित्त न और कहूं ललचाई। जो सुख दुख रहे लगि देहसों ते मिट जायं आलोक बड़ाई॥

23 June, 2010

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 39 of 144

योगिया ध्यान धरैं जिनको, तपसी तन गारि के खाक रमावै। चारों ही वेद ना पावत भेद, बड़े तिर्वेदी नहीं गति पावैं॥

19 June, 2010



A prayer for everyone affected by the Haiti earthquake