मंगल मूरति, मारुति नंदन सकल अमंगल मूल निकंदन

मंगल मूरति, मारुति नंदनसकल अमंगल मूल निकंदन पवन तनय, संतन हितकारी हृदय विराजत अवध बिहारीमंगल मूरति, मारुति नंदनमात पिता, गुरु, गणपति, सारदशिवा समेत शंभु, शुक, नारदमंगल मूरति, मारुति नंदनचरण कमल बंदौ सब काहू देहु राम पद नेह निबाहूमंगल मूरति, मारुति

20 November, 2018

ये जगत मिथ्या है, ये जानने के बाद भी छूटता क्यों नहीं। इसे छोड़ने का तरीका क्या है ?

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ये सब अंतर्मुखी होने के लिए हैं। सेवा करने से आनंद मिलता है, और अगर समाज को पकड़ के कुछ चाहते हो तो दुःख मिलता है।

11 September, 2018








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