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Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 36 of 144, राधिका जू प्रगटी जब ते तब ते तुम केलि कलानिधि पाई

३६.

सूकर ह्वै कब रास रच्यो अरु बावन ह्वै कब गोपी नचाईं।

मीन ह्वै कोन के चीर हरे कछुआ बनि के कब बीन बजाई॥

ह्वै नरसिंह कहो हरि जू तुम कोन की छातन रेख लगाई।

राधिका जू प्रगटी जब ते तब ते तुम केलि कलानिधि पाई॥

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