Anandway: Blog

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Krishna bhajan, Ikli ban me gheri aan, Shyam tane kaisi thhani re

इकली बन में घेरी आन, श्याम तने कैसी ठानी रे

श्याम मोहे बृन्दाबन जानो रे, लौट के बरसाने आनो रे

जो होई देर अबेर, लड़े घर सास-जिठानी रे More...

Pandit Jasraj, Raga Gurjari Todi – चलो सखी सौतन के घर ज‍इहें

चलो सखी सौतन के घर ज‍इहें

मान घटे तो का घट ज‍इहे, पी के दर्सन प‍इहें

ये जोवन अंजुरी को पानी, समो गये पछ्तैये

प्रभु दरश परस कर मन की तपत बुझ‍इहें

चलो सखी सौतन के घर ज‍इहें

मान घटे तो का घट ज‍इहे, पी के दर्सन प‍इहें

Hindi bhajan lyrics, Sumiran karo aadi Bhavani ka

सुमिरन करो आदि भवानी का, सुमिरन करो आदि भवानी का

पहला सुमिरन गणपति देवा, और रिद्धि सिद्धि महारानी का

सुमिरन करो आदि भवानी का, सुमिरन करो आदि भवानी का

दूसरा सुमिरन शंकर जी का, और गौरा महारानी का More...

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 19 of 144

१९.
मानस हों तो वही ‘रसखान’, मिलूँ पुनि गोकुल गाँव के ग्वारन ।
जो पसु होऊँ कहा वस मेरो, चरूँ पुनि नन्द के धेनु मझारन ॥
पाहन हों तो वही गिरि को, जो कियो जिमि छत्र पुरंदर कारन ।
जो खग हो‍ऊँ वसेरो करूँ, नित कालन्दी कूल कदम्ब की डारन ॥

Poet Raskhan says in this sawaiya:

In my next birth, if I am born as a human being, I wish to be born in Gokul as a cowherd boy (so that I get Krishna’s company). If I am born as an animal, I wish I could be a cow in the herd of Nand baba (Krishna’s father) and graze with them. If I am turned into a stone, I wish to be a part of Govardhan hill which was used as shield against raingod Indra’s wrath. If I am a bird I wish to nest in a Kadamb tree on the banks of River Yamuna.

Raskhan’s wish is to be in the company of Krishna or anything that reminds of Him.

More sawaiya verses…

प्रेम - श्री श्री रवि शंकर

जीवन की हर एक इच्छा के पीछे एक ही मांग है। आप यदि परख् कर देखो कि वो मांग क्या है, तो निश्चित रूप से मालुम पड़्ता है कि वह है ढा़ई अक्षर प्रेम क।

सब कुछ हो जीवन में, पर प्रेम न हो, तब जीवन जीवन नहीं रह जाता। प्रेम हो, और कुछ हो या न हो, फिर भी तृप्ति रहती है जीवन में, मस्ती रहती है, आनन्द रह्ता है, है कि नहीं?

~ श्री श्री रवि शंकर

from a commentary on Narad Bhakti Sutra

Krishna bhajan, Darshan do ghanshyam, Narsi Mehta

A beautiful Krishna bhajan from movie Narsi Bhagat (1957), sung by Hemant Kumar, Sudha Malhotra and Manna Dey. Music is by Ravi.

Narsi Mehta’s favourite raga was Kedar, which he used to communicate with Krishna.

Lyrics

दर्शन दो घनश्याम, नाथ मोरी अंखियां प्यासी रे

मन मंदिर की ज्योति जगा दो घट घट वासी रे

दर्शन दो घनश्याम, नाथ मोरी अंखियां प्यासी रे

मंदिर मंदिर मूरत तेरी

फिर भी ना दीखे सूरत तेरी

युग बीते, ना आई मिलन की पूरनमासी रे

दर्शन दो घनश्याम, नाथ मोरी अंखियां प्यासी रे

द्वार दया का जब तू खोले

पंचम स्वर में गूंगा बोले

अंधा देखे, लंगड़ा चल कर पंहुचे काशी रे

दर्शन दो घनश्याम, नाथ मोरी अंखियां प्यासी रे

पानी पी कर प्यास बुझाऊं

नैनों को कैसे समझाऊं

आंख मिचौली छोड़ो अब तो

मन के वासी रे

दर्शन दो घनश्याम, नाथ मोरी अंखियां प्यासी रे

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