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Darshan timings for Sri Banke Bihari temple, Vrindavan

Summer timings (Begin 2 days after Holi)

Morning Darshan: 7.55-11.55 am

Sringar Arti: 7.55 am

Raj Bhog Arti: 11.55 am

Evening Darshan: 5.30-9.30 pm

Shayan Bhog Arti: 9.30 pm

Winter timings (Begin from Yam dwitiya/Bhai Dooj festival, 2 days after Diwali)

Morning Darshan: 8.55-12.55 am

Sringar Arti: 8.55 am

Raj Bhog Arti: 12.55 am

Evening Darshan: 4.30-8.30 pm

Shayan Bhog Arti: 8.30 pm

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 42 of 144

४२.

मोरपखा गल गुंज की माल किये बर बेष बड़ी छबि छाई।

पीत पटी दुपटी कटि में लपटी लकुटी ‘हटी’ मो मन भाई॥

छूटीं लटैं डुलैं कुण्डल कान, बजै मुरली धुनि मन्द सुहाई।

कोटिन काम ग़ुलाम भये जब कान्ह ह्वै भानु लली बन आई॥

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 41 of 144

४१.

अन्त रहौ किधौं अन्तर हौ दृग फारे फिरौं कि अभागिन भीरूं।

आगि जरौं या कि पानी परौं, अहओ कैसी करौं धरौं का विधि धीरूं॥

जो ‘घनआनन्द’ ऐसौ रूची, तो कहा बस हे अहो प्राणन पीरूं।

पाऊं कहां हरि हाय तुम्हें, धरनी में धंसूं कि अकाशहिं चीरूं॥

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 40 of 144

४०.

संकर से मुनि जाहि रटैं चतुरानन चारों ही आनन गावैं।

जो हिय नेक ही आवत ही मति मूढ़ महा ‘रसखान’ कहावैं॥

जापर देवी ओ देब निह्हरत बारत प्राण न वेर लगावैं।

ताहि अहीर की छोहर्या छछिया भर छाछ पै नाच नचावैं॥

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 39 of 144

३९.

योगिया ध्यान धरैं जिनको, तपसी तन गारि के खाक रमावै।

चारों ही वेद ना पावत भेद, बड़े तिर्वेदी नहीं गति पावैं॥

स्वर्ग औ मृत्यु पतालहू मे जाको नाम लिये ते सवै सिर नावैं।

चरनदास कहै, तेहि गोपसुता, कर माखन दै दै के नाच नचावैं॥

Sawaiya poetry from vrindavan is in Brajbhasha and is used beautifully in raslilas.

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 37 of 144

३७.

चैन नहीं दिन रैन परै जब ते तुम नयनन नेक निहारे।

काज बिसार दिये घर के व्रजराज! मैं लाज समाज विसारे॥

मो विनती मनमोहन मानियो मोसों कबू जिन हूजियो न्यारे।

मोहि सदा चितसों अनि चाहियो नीके कै नेह निबाहियो प्यारे॥

Sawaiya verses from Vrindavan are an expression of devotion to Sri Radha Krishna.

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 33 of 144 ‘रसखान’ गोविन्द को यों भजिये जिमि नागरि को चित गागरि में

३३.

सुनिये सब की कहिये न कछू, रहिये इमिया भव वागर में।

करिये व्रत नेम सचाई लिये जेहि सों तरिये भवसागर में॥

मिलिये सब सों दुरभाव बिना रहिये सतसंग उजागर में।

‘रसखान’ गोविन्द को यों भजिये जिमि नागरि को चित गागरि में॥

vishnu-govind


Raskhan says in this sawaiya verse:

Live your daily life normally, but keep your mind on Govind. Just as a village belle returning from the river, carrying pots full of water on her head is behaving normally with her friends, chatting, greeting, walking… Yet, her attention never leaves her water pots on her head. If she is not attentive to her pots, they could crash any time!

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