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Sri Banke Bihari ke sawaiya, 26 of 144

२६.

दे लिखि बांहन पे व्रजचन्द्र सो गोल कपोलन कुंज बिहारी।

त्यों ‘पदमाकर’ हीय हरी लिखि गोसो गोविन्द गरे-गिरिधारी॥

या बिधि ते नख से सिख लौं लिख कन्त के नाम अनन्त है प्यारो।

गोरे से अंग में गोद दे श्याम सो हे गोदनान की गोदनहारी॥

In this sawaiya verse by Braj poet Padmakar, in fond remembrance of Krishna (smaran bhakti, स्मरण भक्ति) Gopi is asking a tattoo-maker to tattoo several of Krishna’s names on her body.

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