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Roadmaps to joy!

Swami Ramtirtha says, Joy is in giving

  • वेदान्त आप से यह अंगीकार कराना चाहता है कि सुख मात्र देने में है, लेने अथवा भीख मांगने में नहीं।
  • वेदान्त दर्शन के प्रचार का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है इसे अपने आचरण में लाना – निर्लिप्त साक्षी के रूप में सब झंझटों से मुक्त होकर कर्म करो – सदा स्वतंत्र और निर्लिप्त रहो।
  • संपूर्ण स्वर्ग आपके भीतर है – संपूर्ण सुख का स्रोत आपके भीतर है – ऐसी स्थिति में अन्यत्र आनन्द को ढूंढना कितना अनुचित और असंगत है।
  • सांसारिक भोग-विलास की भूमि में बोये हुये बीज से अध्यात्मिक विकास का पौधा नहीं पनप सकता।
  • दैवी विधान यह है कि मनुष्य मन से आराम में, शांति में, एवं क्षोभ-रहित अवस्था में रहे और तन से सदा काम में लगा रहे।
  • अज्ञानवश तुम अपने को शरीर कहते हो प्रन्तु शरीर तुम हो नहीं, तुम अनन्त शक्ति हो, ईश्वर हो, नित्य और निर्विकार हो – तुम वही हो, उसे जानो और तुम फिर अपने को सारे संसार में और समस्त विश्व में ओत-प्रोत पाओगे।

~ स्वामी रामतीर्थ

Swami Ramtirtha says, Know that you are infinite, God

शरीर से ऊपर उठो – समझो और अनुभव करो कि मैं अनन्त हूं – परमात्मा हूं, और इसलिये मुझ पर मनोविकार और लोभ भला कैसा प्रभाव डाल सकते हैं।

~ स्वामी रामतीर्थ

Swami Ramtirtha’s quote on Brahman

“ब्रह्म ही एकमात्र सत्य है – नामरूपात्मक जगत मिथ्या है।”

~ स्वामी रामतीर्थ

Only Brahma is. This world with all its names and forms is not the absolute truth. (translated)

Swami Ramtirtha’s sayings

  • सफलता का रहस्य है वेदान्त को व्यवहार में लाना। व्यावहारिक वेदान्त ही सफलता की कुंजी है।
  • तुम एक मात्र सत्य पर आरूढ़ हो – इस बात से भयभीत मत हो कि अधिकांश लोग तुम्हारे विरुद्ध हैं।
  • जिस चीज़ को स्वीकार करो या जिस धर्म पर विश्वास करो, उसकी निजी श्रेष्ठता के कारण से करो – स्वयं जांच पड़ताल करो – खूब छानबीन कर लो।
  • वेदान्त शब्द का सीधा-सादा अर्थ है परम तत्व। वह तत्व, वह सत्य तुम्हारी निजी वस्तु है। वह जैसी राम की है वैसी तुम्हारी है। वह तत्व किसी एक की सम्पत्ति नहीं परन्तु प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक वस्तु उस परम तत्व की है।
  • धर्म का सार तत्व है अपने ऊपर से पर्दे का उठाना अर्थात अपने आप का रहस्य जानना।
  • वेदान्त आपकी कामनाओं को छीन कर आप को दुखी नहीं बनाता, किन्तु वेदान्त आपसे इन इच्छाओं का सदुपयोग करने के लिये कहता है जिससे वे आधीन रहें। इच्छाओं द्वारा क्रूरतापूर्वक शासित होने के स्थान में वेदान्त आपको उनका शासक बनाना चाहता है।
  • सच्चे धर्म का मतलब ईश्वर शब्द का विश्वास करने की अपेक्षा भलाई पर अधिक विश्वास करना है।
  • प्रार्थना करना कुछ शब्दों को दुहराना नहीं है – प्रार्थना का अर्थ है परमात्मा का मनन और अनुभव करना।
  • भय और दण्ड से पाप कभी बंद नहीं होते।
  • सत्य तो वह है जो तीनों कालों में एक समान रहता है, जैसा कल था, वैसा ही आज है और वैसा ही सदा आगे रहेगा – किसी घटना विशेष से उनका संबंध नहीं जोड़ा जा सकता।

Swami Ramtirtha’s poem, I am what you are

जो तू है सो मैं हूं, जो मैं हूं सो तू है।

न कुछ आरज़ू है, न कुछ जुस्तजू है॥

बसा राम मुझ में, मैं अब राम में हूं।

न इक है, न दो हैं, सदा तू ही तू है॥

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