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Pandit Birju Maharaj Kathak classes at Art of Living International Center, Bangalore, India

Kathak workshop with Pandit Birju Maharaj 2014-11-27 to 2014-11-30 Bangalore

birju maharaj art of living

The Programmes integrate Pandit Birju Maharaj ji’s Kathak dance training with simple Yoga, powerful breathing techniques, Meditations, rejuvenating Ayurveda (an ancient healing science) and much more!

Programmes: Basic and Advanced Levels

Dates: 27th - 30th November 2014
(Check-in: 26th evening, Check-out: 30th 6 pm onwards)

Eligibility:  Basic for Beginners: Is open for all above 17 years of age
                 Advanced: Is open for all above 17 years of age having a minimum 3 years training in Kathak

Pre-Registration Required.

For More Details
Email: aolnrityasadhana@gmail.com
For Details call: 080 67262637, 8123474509
Register at: www.bangaloreashram.org

Pandit ji belongs to Lucknow gharana of Kathak, and I have been privileged to attend a training workshop withhim at Kathak Kendra, Gomtinagar, Lucknow in the year 2006. It was unforgettable! Dance is a wonderful therapy. Kathak is an eminent classical dance of India, and it is amazing to learn it with such ease from the legendary Pandit Birju Maharaj.

Kathak students still visit his ancestral home in Lucknow to seek blessings. His lineage

Kabir Nirgun song by Malini Awasthi with lyrics, Jara Dheere Gaadi Haanko More Ram

जरा धीरे धीरे गाड़ी हांको मोरे राम गाड़ीवाले, जरा ह��्के गाड़ी हांको मोरे राम गाड़ीवाले

या गाड़ी म्हारी रंग रंगीली, पहिया लाल गुलाल

फागुन वालो छैल छबीलो और बैठन वाले दाम

जरा हल्के गाड़ी हांको मोरे राम गाड़ीवाले

देस देस का वैद बुलाया, लाया जड़ी और बूटी

जड़ी़ और बूटी कुछ काम ना आई, जब राम के घर टूटी

चार कहार मिलि उठायो, दु‍ई काठ की जोड़ी

ल‍ई जा मरघट पे रख दई और फूंक दी‍ए जस होली

जरा हल्के गाड़ी हांको मोरे राम गाड़ीवाले

The poem is written by Saint Kabir who was born in Varanasi.

Chaiti song by Malini Awasthi Chadhat Chait Chit Laage, with lyrics

चढ़इल चैत चित लागे न बाबा के भवनवा

बीर बमनवा सगुन बिचारो

कब हु‍इहैं पिया से मिलनवा

चढ़इल चैत चित लागे न बाबा के भवनवा

Chaiti is a folk genre in Indian music from Uttar Pradesh, Bihar.

Kajari folk song from Mirzapur by Malini Awasthi with lyrics

A Kajari song from Mirzapur by Malini Awasthi. It is sung in the rainy season, especially on Kajali Teej festival at Vindhyavasini Devi temple, Mirzapur, Uttar Pradesh, India.

अरे रामा सावन मा घनघोर बदरिया छाई रे हारी

घन उमड़ घुमड़ के छाये, उत कजारे घन छाये रे रामा

अरे रामा झींगुर की छनकारि, पिया को लागे प्यारी रे हारी

झूला पड़ा कदम की डारि, झूलें ब्रिज के नर नारि

अरे रामा पेंग बढ़ावे राधा प्यारी, पिया को लागे प्यारी रे हारी

अरे रामा सावन मा घनघोर बदरिया छाई रे हारी

बदरिया छाई रे हारी

Malini Awasthi singing Bidai song Nimiya ke Ped, with lyrics

बाबा निमिया के पेड़ जिनि काटियो रे, निमिया पे चिरैया के बसेरे,

बलैंया लेहुं भैया के

बाबा सगरी चिरैया उड़ि जैहे

रहि ज‍इ निमिया अकेलि

बलैया लेहुं भैया के

बाबा सगरी बिटिया घरि चले ज‍इहे

माई रहि जाये अकेलि

बलैया लेहुं भैया की

Janmashtmi Dadra song by Malini Awasthi

राधा कृष्ण की दासिनी, कृष्ण राधा को दास

जनम प्रभु सभी को दीजिये वृन्दावन को वास

श्याम तोहे नजरिया लग जायेगी

दिन नहीं चैन, रैन नहीं निंदिया

सुन तोरी मुरलिया, मैं मर जाउंगी

श्याम तोहे नजरिया लग जायेगी

अईले कन्हैया, रे अईले कन्हैया

नंद बाबा घर अईले कन्हैया

देवकी ने जाये लाल, जशोदा ने पाये

सोये पहराउ लेके वसुदेव आये

जसोदा से नेग खातिर झगरे नौनिया

नंद बाबा घर अईले कन्हैया

Malini Awasthi singing Batohiya, with lyrics

सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा

मोरे प्रान बसे हिमखोह रे बटोहिया

जाओ जाओ भैया रे बटोही हिंद देखि आओ

जहां ऋषि चारो वेद गावे रे

सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा

मोरे प्रान बसे हिमखोह रे बटोहिया

गंगा के, जमुना के जगमग पनिया रे

सरजू झमकि लहि जावे रे

सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा रे

मोरे बाप दादा की कहानी रे, बटोहिया

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