Anandway: Blog

Roadmaps to joy!

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya 21 of 144

२१.
सावन तीज सुहावन कों सखि, सोहैं दुकूल सवै सुख साधा ।
देखे बनैं कहते न बनैं, उमगै उर में अनुराग अबाधा ॥
प्रेम के हेम हिंडोरन में, सरसै बरसै रस रंग अगाधा ।
राधिका के हिय झूलत साँवरो, साँवरे के हिय झूलति राधा ॥

This sawaiya depicts the rainy season and month of savan. In India this season is celebrated by hanging swings from trees and swinging on them.

The poet says in this sawaiya verse:

This is the festival of Teej in saavan. All residents of Vrindavan are dressed to celebrate. I cannot express the beauty and joy that I find here. My heart is overwhelmed with bliss. On the golden swing of love, decorated in so many colours, Radha swings in the heart of Krishna and Krishna swings in Radha’s heart :-)

More sawaiya verses…

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 19 of 144

१९.
मानस हों तो वही ‘रसखान’, मिलूँ पुनि गोकुल गाँव के ग्वारन ।
जो पसु होऊँ कहा वस मेरो, चरूँ पुनि नन्द के धेनु मझारन ॥
पाहन हों तो वही गिरि को, जो कियो जिमि छत्र पुरंदर कारन ।
जो खग हो‍ऊँ वसेरो करूँ, नित कालन्दी कूल कदम्ब की डारन ॥

Poet Raskhan says in this sawaiya:

In my next birth, if I am born as a human being, I wish to be born in Gokul as a cowherd boy (so that I get Krishna’s company). If I am born as an animal, I wish I could be a cow in the herd of Nand baba (Krishna’s father) and graze with them. If I am turned into a stone, I wish to be a part of Govardhan hill which was used as shield against raingod Indra’s wrath. If I am a bird I wish to nest in a Kadamb tree on the banks of River Yamuna.

Raskhan’s wish is to be in the company of Krishna or anything that reminds of Him.

More sawaiya verses…

Krishna bhajan, Mukut varo kunjan me sataki gayo re

मुकुट वारो कुन्जन में सटकि गयो रे

जनम को रारी, है नाम बनवारी

हमारो जिया वही में अटकि गयो रे

कदम की छैया चरावे नित गैया

हमारो जिया वही में अटकि गयो रे

मुकुट वारो कुन्जन में सटकि गयो रे

हमारी गली आयो, तनिक मुस्कायो

हमारो जिया वही में अटकि गयो रे

मुकुट वारो कुन्जन में सटकि गयो रे

ब्रज की डगर पे बजावे जो बांसुरिया

हमारो जिया वही में अटकि गयो रे

मुकुट वारो कुन्जन में सटकि गयो रे

Meaning of Krishna bhajan

Krishna, who wears a crown has given me the slip in the bowers of Vrindavan. His name is Banwari, and this is how he has been playing I spy with me for many lifetimes. He is such a fighter-cock. I have lost my heart to him.

He takes cows for grazing and waits for them under the Kadamb tree. I have lost my heart to him. Krishna, who wears a crown has given me the slip in the bowers of Vrindavan.

He came to my street, and smiled. I have lost my heart to him. Krishna, who wears a crown has given me the slip in the bowers of Vrindavan.

He plays his flute and attracts me to Vrindavan. I have lost my heart to him. Krishna, who wears a crown has given me the slip in the bowers of Vrindavan.

More:

Banke Bihari arti and verses

Stories from Banke Bihari temple

Banke Bihari temple and bazaar, Photo journal

Banke bihari ji ke sawaiya/dohe

Art of Living Advanced meditation course at Vrindavan, 1-4 April, 2010

Special features will be:

  • Parikramas are planned in select areas like Nandgaon, Vrindavan and Govardhan
  • Knowledge from Yoga Vasishta each day by Shri. Arunji
  • Satsangs with him - Govinda Nama sankirtan
  • Special Q&A session with Swami Swatantrananda at his Ashram
  • Sookshmavyayam sessions each day to enrich the overall experience.


You may choose to schedule your departure for the afternoon of 4th April, 2010.
As there is a ceiling on enrolment, please advise your participation to the following mobile
numbers or email ids.
Sri Sunder +91-9443702251, E-mail: sundar59@airtelmail.in
Sri Ravvi +91- 9444904644, E-mail: ravvichandran@gmail.com

Krishna bhajan in Hindi, 2

Narayan param dayalu re, bhajo Radhe Govinda…

Krishna bhajan in Hindi, 2, Narayan param dayalu re, bhajo Radhe Govinda, नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

वृन्दावन में रास रचायो

लूट-लूट दधि माखन खायो

मोहन रास बिहारी रे

भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

इन्द्र नें ब्रज पर नेह बरसायो,

नख ऊपर गिरिराज उठायो

गोवर्धन गिरधारी रे

भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

नाग नाथ के यमुना उबारयो

मामा कंस को मार गिरायो

चक्र सुदर्श्नधारी रे

भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

चुरा चुरा कर माखन खायो

ब्रज गोपिन को नाच नचायो

माखन चोर कहायो रे

भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

भक्त सुदामा चावल लाये

तीन भुवन को भूप बनाये

ऐसे दीन-दुख-हारी रे

भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

दुर्योधन को भोग ना खायो

रूखो साग विदुर घर खायो

ऐसो प्रेम पुजारी रे

भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

Krishna bhajan in Hindi, 1

Krishna bhajan in Hindi, 1

सुनो टेर मेरी, अहो कृष्ण प्यारे

कनक पाट खोलो, हैं द्वारे पे आये

सुना है पतितों को पावन बनाते

सुना है कि दुखियों को हृदय से लगाते

यही आस ले दासी द्वारे पे आई

सुनो टेर मेरी, अहो कृष्ण प्यारे

कनक पाट खोलो, हैं द्वारे पे आये

सुना हमनें मुरली की है तान प्यारी

सुना है कि मोहनी मूरत तुम्हारी

दरश दीजिये हमको बांके बिहारी

सुनो टेर मेरी, अहो कृष्ण प्यारे

कनक पाट खोलो, हैं द्वारे पे आये

सुना है कि गोपिन से माखन चुराते

सुना है कि नित बन में रास रचाते

यही ढूंढते हैं ये लोचन हमारे

सुनो टेर मेरी, अहो कृष्ण प्यारे

कनक पाट खोलो, हैं द्वारे पे आये

This is a bhajan my mother sings.

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