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Ram Navmi folk song by Malini Awasthi, with Lyrics

राजा दसरथ जी के घरवा, आज जनमें ललनवा

जनमें ललनवा, जी जनमें ललनवा,

राजा दसरथ जी के घरवा, आज जनमें ललनवा |

राजा दसरथ मोहर लुटावें, सोना लुटावें

अरु लुटावें देखो गैया,

आज जनमें ललनवा

राजा दसरथ जी के घरवा, आज जनमें ललनवा 

पण्डित आवें, रसिया बिचारें

जुग जुग जीवें ललनवा,

आज जनमें ललनवा

राजा दसरथ जी के घरवा, आज जनमें ललनवा

नौमी तिथि आज सीत न घामा,

भये प्रकट दीनदयाला

राजा दसरथ जी के घरवा, आज जनमें ललनवा |

Ram navami special: Ram Janam from Sri Ramcharitmanas

छं0-भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।।
लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी।
भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी।।
कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता।
माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता।।
करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता।
सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता।।
ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै।
मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर पति थिर न रहै।।
उपजा जब ग्याना प्रभु मुसकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै।
कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै।।
माता पुनि बोली सो मति डौली तजहु तात यह रूपा।
कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा।।
सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा।
यह चरित जे गाव��िं हरिपद पावहिं ते न परहिं भवकूपा।।
दो0-बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार।।192।।

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