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Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 42 of 144

४२.

मोरपखा गल गुंज की माल किये बर बेष बड़ी छबि छाई।

पीत पटी दुपटी कटि में लपटी लकुटी ‘हटी’ मो मन भाई॥

छूटीं लटैं डुलैं कुण्डल कान, बजै मुरली धुनि मन्द सुहाई।

कोटिन काम ग़ुलाम भये जब कान्ह ह्वै भानु लली बन आई॥

Hindi bhajan lyrics, Radhe ka naam hai anmol

राधे का नाम है अनमोल, रटे जा राधे राधे

१. गैया भी बोले राधे, बछड़े भी बोले राधे, दूध की धार से आवाज़ आये राधे राधे

२. गोकुल में राधे राधे, मथुरा में राधे राधे, वृन्दावन रजकण से आवाज़ आये राधे राधे

३. गोपी भी बोले राधे, ग्वाले भी बोलें राधे, कान्हा की बंसी से आवाज़ आये राधे राधे

४. गंगा भी बोले राधे, सरजू भी बोले राधे, यमुना की लहरों से आवाज़ आये राधे राधे

५. भक्त भी बोलें राधे, संत भी बोलें राधे, सांसों की तार से आवाज़ आये राधे राधे

६. ढ़ोलक भी बोले राधे, झांझर भी बोले राधे, हृदय के भीतर से आवाज़ आये राधे राधे

Sri Banke Bihari ji ke sawaiye, 32 of 144, A search for nirgun and sagun Brahman

३२.

ब्रह्म में ढूंढ्यो पुरानन वेदन भैद सुन्यो चित चौगुने चायन।

देख्यो सुन्यो न कहूं कबहूं वह कैसे स्वरूप औ कैसे सुभायन॥

ढूंढत ढूंढत हारि परयो ‘रसखानि’ बतायो न लोग लुगायन।

देख्यो कहां वह कुंज कुटीर में बैठो पलोटन राधिका पायन॥

This sawaiya verse illustrates poet Raskhan’s search for nirgun and sagun Brahman.

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 24 of 144

२४.
मंजुल मोरपखा छहरै छवि सों जब ग्रीव कछु मटकावत ।
नूपुर की झनकारन पै झुकि ग्वालिन गोधन गीत गवांवत ॥
आननचन्द सु मन्द हंसी ‘रतनाकर’ माल हिये लहरावत ।
देखि सखी वह मैन लजावत सांवरो बेनु बजावत आवत ॥

Krishna in Vrindavan :-)

Krishna bhajan, Ikli ban me gheri aan, Shyam tane kaisi thhani re

इकली बन में घेरी आन, श्याम तने कैसी ठानी रे

श्याम मोहे बृन्दाबन जानो रे, लौट के बरसाने आनो रे

जो होई देर अबेर, लड़े घर सास-जिठानी रे More...

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