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Krishna bhajan in Hindi, 2

Narayan param dayalu re, bhajo Radhe Govinda…

Krishna bhajan in Hindi, 2, Narayan param dayalu re, bhajo Radhe Govinda, नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

वृन्दावन में रास रचायो

लूट-लूट दधि माखन खायो

मोहन रास बिहारी रे

भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

इन्द्र नें ब्रज पर नेह बरसायो,

नख ऊपर गिरिराज उठायो

गोवर्धन गिरधारी रे

भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

नाग नाथ के यमुना उबारयो

मामा कंस को मार गिरायो

चक्र सुदर्श्नधारी रे

भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

चुरा चुरा कर माखन खायो

ब्रज गोपिन को नाच नचायो

माखन चोर कहायो रे

भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

भक्त सुदामा चावल लाये

तीन भुवन को भूप बन��ये

ऐसे दीन-दुख-हारी रे

भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

दुर्योधन को भोग ना खायो

रूखो साग विदुर घर खायो

ऐसो प्रेम पुजारी रे

भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

नारायण परम दयालु रे, भजो राधे गोविन्दा

राधे गोविन्दा, भजो राधे गोविन्दा…

Krishna bhajan in Hindi, 1

Krishna bhajan in Hindi, 1

सुनो टेर मेरी, अहो कृष्ण प्यारे

कनक पाट खोलो, हैं द्वारे पे आये

सुना है पतितों को पावन बनाते

सुना है कि दुखियों को हृदय से लगाते

यही आस ले दासी द्वारे पे आई

सुनो टेर मेरी, अहो कृष्ण प्यारे

कनक पाट खोलो, हैं द्वारे पे आये

सुना हमनें मुरली की है तान प्यारी

सुना है कि मोहनी मूरत तुम्हारी

दरश दीजिये हमको बांके बिहारी

सुनो टेर मेरी, अहो कृष्ण प्यारे

कनक पाट खोलो, हैं द्वारे पे आये

सुना है कि गोपिन से माखन चुराते

सुना है कि नित बन में रास रचाते

यही ढूंढते हैं ये लोचन हमारे

सुनो टेर मेरी, अहो कृष्ण प्यारे

कनक पाट खोलो, हैं द्वारे पे आये

This is a bhajan my mother sings.

Krishna bhajan in Punjabi,1

Krishna bhajan in Punjabi

श्यामा फड़ेया पितांबर तेरा, कित्थे नस के जावेगा

हुन मैं आन डिगी दर तेरे, दर्शन कदों दिखावेगा

छडेया तेरे लई ज़माना, तूं ना लांवी कोई बहाना

असां छड के न‍इयों जाना, जद तक खैर ना पावेगा

श्यामा फड़ेया पितांबर तेरा, कित्थे नस के जावेगा

हुन मैं आन डिगी दर तेरे, दर्शन कदों दिखावेगा

तेरे प्रेम अन्दर पई चीका, मैनूं लोकी लांदे लीका

मैनूं तेरियां रहन उडीकां केड़े वेले आवेंगा

श्यामा फड़ेया पितांबर तेरा, कित्थे नस के जावेगा

हुन मैं आन डिगी दर तेरे, दर्शन कदों दिखावेगा

My mother sings this bhajan for Krishna :-)

Holi rasiya from Vrindavan, bahut dinan se roothe shyam ko holi me

Holi song from Vrindavan, Sri Banke Bihari, bahut dinan se mai roothe shyam ko holi me mana laungi

बहुत दिनन से मैं रूठे श्याम को

होली में मना लाउंगी

मना लाउंगी…

वृन्दावन की कुंज गलिन से

गोदी में उठा लाउंगी

मना लाउंगी…

बहुत दिनन से मैं रूठे श्याम को

होली में मना लाउंगी

मना लाउंगी…

अपने आंगन फाग रचा के

भव से उतर जाउंगी

मना लाउंगी…

बहुत दिनन से मैं रूठे श्याम को

होली में मना लाउंगी

मना लाउंगी…

More Holi songs

Holi is a festival of colour-play in India. In Vrindavan, it has a special significance. The idea is to soak in the colours of divinity/divine love :-) Happy Holi from Vrindavan…

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 20 of 144

A sawaiya verse by Raskhan

Krishna painting

२०.
ए सजनी वह नन्द को साँवरो, या बन धेनु चराय गयो है ।
मोहन तानन गोधन गाय के वेणु बजाय रिझाय गयो है ॥
ताही घरी कछु टोना सो कै, ‘रसखानि’ हिये में समाय गयो है ।
को‍ऊ न काहू की कानि करै, सिगरो ब्रज बीर बिकाय गयो है ॥

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Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 18 of 144

१८.
राधिका कान्ह को ध्यान धरैं, तब कान्ह ह्वै राधिका के गुण गावैं ।
त्यों अँसुवा बरसैं बरसाने को पाती लिखैं लिखि राधे को ध्यावैं ॥
राधे ह्वै जायँ घरीक में ‘देव’ सु प्रेम की पाती लै छाती लगावैं ।
आपने आप ही में उरझैं सुरझैं , उरझैं, समुझैं समुझावैं ॥

This Braj sawaiya verse by poet Prem, says:

Radhika in her love for Krishna, begins to feel as Krishna and longs for Radhika. Tears of longing for Radha fill her eyes and she writes a letter for her and sends it to Barsana. Then quickly comes back to being Radhika and takes the letter and embraces it, close to her heart. The poet Prem says, this is how she engages in her love for Krishna. She meditates on him and becomes one with Him :-) and doesn’t know the difference between herself and Krishna when she thinks of Him.

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