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Krishna bhajan – Nandlal Gopal Daya Kar Ke Vrindavan Mohe Basa Lena

Radha Ramanj ji in Vrindavan

Photo credit: Amala Saci

नन्दलाल गोपाल दया कर के वृन्दावन मोहे बसा लेना; आंखों से पर्दा हटा मोहे, निज रूप का दर्श दिखा देना

१. धन धाम ना मांगू तुझसे कभी, कोई और ना आस मुराद मेरी; मोहे चरणों मे अपने बिठा लो हरि, मोहे नाम का जाप सिखा देना

२. जी चाहता है तेरी सेवा करूं, तेरी सांवरी सूरत देखा करूं; तेरे चरणों को धो धो पिया करूं, मोहे चरणों की दासी बना लेना

३. मायाजाल में मैं तो ऐसी फंसी, तेरा नाम ही लेना भूल गई; मेरी अंत में होगी क्या ही दशा; मोहे बांके बिहारी बचा लेना

४. मिले भक्तों के काम से समय अगर, दासी पे करना दया की नज़र; जब उमड़ेगा भव का सागर, मोहे आ के पार लगा देना

Jo nar dukh mein dukh nahi mane, a message for spiritual seekers

Guru Tegh Bahudar's Shabad renderd by Shrikant Bakre

A message for spiritual seekers from Sri Guru Granth Sahib:

जो नर दुख में दुख नहिं मानै।
A person who does not wallow in sorrow and does give undue importance to sorrow,

सुख सनेह अरु भय नहिं जाके, कंचन माटी जानै।।
Who is not craving for happiness, and is not afraid; who knows gold and mud to be the same in essence,

नहिं निंदा नहिं अस्तुति जाके, लोभ-मोह अभिमाना।
Who is not influenced by criticism or praise; who is free of greed, attachment and an egocentric approach to life.

हरष शोक तें रहै नियारो, नाहिं मान-अपमाना।।
Who is not disturbed by joy and sorrow, respect and insult

आसा मनसा सकल त्यागि के, जग तें रहै निरासा।
Since he has no craving for fulfillment of desires, he wants nothing from the world and its people;

काम, क्रोध जेहि परसे नाहीं, तेहि घट ब्रह्म निवासा।।
Who does not have even a spec of craving and anger, in such a person the divine consciuosness of Brahm is evident and manifest.

गुरु किरपा जेहि नर पै कीन्हीं, तिन्ह यह जुगुति पिछानी।
By the grace of a Sadguru, a person discovers the technique to do so.

नानक लीन भयो गोबिंद सों, ज्यों पानी सों पानी।।
Guru Nanak has dissolved in Govind (God) just as water mixes with water. He has become one with Govind. [Aham Brahmasmi]

~ Guru Teg Bahadur

Hindi bhajan lyrics, Daya karo to abhi hi kar do

दया करो तो अभी ही कर दो, हे नाथ फिर कब दया करोगे?

सुनाई होगी ना नाथ जब तक, पुकार यूं ही सुना करोगे

१. अगर तुम्हारी दया ना होगी, तो नाथ मेरी गुज़र ना होगी; ख़ता है मेरी ज़रूर लाखों, हे नाथ तुम ही क्षमा करोगे

२. भंवर के बस में पड़ी है नैया, सहारा देखूं तुम्हारा कब तक; करो किनारे पे जल्दी आकर, हुई जो देरी तो क्या करोगे

३. सुना है हम अंश हैं तुम्हारे, तुम्हीं हो सच्चे प्रभु हमारे; पसारो भुज को, उबारो मुझ को, जनम जन्म से हूं मैं फंसाया

Surdas bhajan lyrics, Sabse oonchi prem sagaai

सबसे ऊंची प्रेम सगाई

१. दुर्योधन के मेवा त्याग्यो, साग विदुर घर खाई

४. जूठे फल शबरी के खाये, बहु विधि स्वाद बताई

३. राजसूय यज्ञ युधिष्ठिर कीन्हा, तामे जूठ उठाई

५. प्रेम के बस पारथ रथ हांक्यो, भूल गये ठकुराई

६. ऐसी प्रीत बढ़ी वृन्दावन, गोपियन नाच नचाई

२. प्रेम के बस नृप सेवा कीन्हीं, आप बने हरि नाई

७. सूर क्रूर एहि लायक नाहीं, केहि लगो करहुं बड़ाई

Surdas was one of the Ashtsakha (8 friends of Krishna), appointed by Mahaprabhu Vallabhacharya ji to perform Raga seva to Sri Govardhan Nath ji (the Krishna deity, uncovered by Mahaprabhu ji on Govardhan Hill near Vrindavan, Mathura.

Pandit Jasraj sings Sab se oonchi prem sagaai

Hindi bhajan lyrics, Radhe ka naam hai anmol

राधे का नाम है अनमोल, रटे जा राधे राधे

१. गैया भी बोले राधे, बछड़े भी बोले राधे, दूध की धार से आवाज़ आये राधे राधे

२. गोकुल में राधे राधे, मथुरा में राधे राधे, वृन्दावन रजकण से आवाज़ आये राधे राधे

३. गोपी भी बोले राधे, ग्वाले भी बोलें राधे, कान्हा की बंसी से आवाज़ आये राधे राधे

४. गंगा भी बोले राधे, सरजू भी बोले राधे, यमुना की लहरों से आवाज़ आये राधे राधे

५. भक्त भी बोलें राधे, संत भी बोलें राधे, सांसों की तार से आवाज़ आये राधे राधे

६. ढ़ोलक भी बोले राधे, झांझर भी बोले राधे, हृदय के भीतर से आवाज़ आये राधे राधे

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 36 of 144, राधिका जू प्रगटी जब ते तब ते तुम केलि कलानिधि पाई

३६.

सूकर ह्वै कब रास रच्यो अरु बावन ह्वै कब गोपी नचाईं।

मीन ह्वै कोन के चीर हरे कछुआ बनि के कब बीन बजाई॥

ह्वै नरसिंह कहो हरि जू तुम कोन की छातन रेख लगाई।

राधिका जू प्रगटी जब ते तब ते तुम केलि कलानिधि पाई॥

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 35 of 144

Sri Govind Dev ji, Jaipur

३५.

मन में बसी बस चाह यही प्रिय नाम तुम्हारा उचारा करूं।

बिठला के तुम्हें मन मंदिर में मन मोहन रूप निहारा करूं॥

भर के दृग पात्र में प्रेम का जल पद पंकज नाथ पखारा करूं।

बन प्रेम पुजारी तुम्हारा प्रभो नित आरती भव्य उतारा करूं॥

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