Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 38 of 144, Prayer to Krishna

ऐसी करा नव लाल रंगीले जू चित्त न और कहूं ललचाई। जो सुख दुख रहे लगि देहसों ते मिट जायं आलोक बड़ाई॥

23 June, 2010

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 39 of 144

योगिया ध्यान धरैं जिनको, तपसी तन गारि के खाक रमावै। चारों ही वेद ना पावत भेद, बड़े तिर्वेदी नहीं गति पावैं॥

19 June, 2010


Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 35 of 144

Sri Govind Dev ji, Jaipur

मन में बसी बस चाह यही प्रिय नाम तुम्हारा उचारा करूं। बिठला के तुम्हें मन मंदिर में मन मोहन रूप निहारा करूं॥

08 June, 2010

Sri Banke Bihari ke sawaiya, 34 of 144, वे तो लली वृषभान लली की गली के गुलाम हैं

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Sawaiya verses are part of the rich literary heritage of Braj (Mathura-Vrindavan). They are dramatised in raslila performances. ३४. द्वार के द्वारिया पौरि के पौरिया पाहरुवा घर के घनश्याम हैं। दास के दास सखीन के सेवक पार परोसिन के धन धाम हैं॥

19 May, 2010



Ram Navmi folk song by Malini Awasthi, with Lyrics