Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 44 of 144

केहि पापसों पापी न प्राण चलैं अटके कित कौन विचारलयो। नहिं जानि परै ‘हरिचन्द’ कछू विधि ने हमसों हठ कौन ठयो॥

07 October, 2010

Radha Krishna aarti video and lyrics from Rangeeli Mahal, Barsana

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की एक सिर मोर मुकुट राजे एक सिर चूनर छवि साजे दुहुन सिर तिरछे भल भ्राजे संग ब्रजबाल, लाडली लाल, बांह गल डाल ‘कृपालु’ दुहुन दृग चारि की

23 August, 2010

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 43 of 144, Virah bhaav

Krishna and Meera, Braj ke sawaiya

मनमोहन सों बिछुरी जबसों तन आँसुन सौ सदा धोवती हैं। ‘हरिचन्द’ जू प्रेम के फन्द परी कुल की कुललाजहिं खोवती हैं॥

09 August, 2010

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 35 of 144

Sri Govind Dev ji, Jaipur

मन में बसी बस चाह यही प्रिय नाम तुम्हारा उचारा करूं। बिठला के तुम्हें मन मंदिर में मन मोहन रूप निहारा करूं॥

08 June, 2010

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 31 of 144

या छवि कूं ‘रसखान’ विलोकत बारत काम कलानिधि कोटी। काग के भाग कहा कहिये हरि हाथ ते लै गयो माखन रोटी॥ A Braj sawaiya by poet Raskhan.

07 May, 2010


Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 18 of 144

१८. राधिका कान्ह को ध्यान धरैं, तब कान्ह ह्वै राधिका के गुण गावैं । त्यों अँसुवा बरसैं बरसाने को पाती लिखैं लिखि राधे को ध्यावैं ॥ राधे ह्वै जायँ घरीक में ‘देव’ सु प्रेम की पाती लै छाती लगावैं । आपने आप ही में उरझैं सुरझैं , उरझैं,

21 October, 2009

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 20 of 144

Krishna painting

मानस हों तो वही ‘रसखान’, मिलूँ पुनि गोकुल गाँव के ग्वारन । जो पसु होऊँ कहा वस मेरो, चरूँ पुनि नन्द के धेनु मझारन ॥ पाहन हों तो वही गिरि को, जो कियो जिमि छत्र पुरंदर कारन । जो खग हो‍ऊँ वसेरो करूँ, नित कालन्दी कूल कदम्ब की डारन ॥ Raskhan says

13 November, 2009

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 16 of 144

Krishna playing flute in Vrindavan, Venugeet

This sawaiya verse says: Krishna is very naughty.… He sends the music of his flute as a messenger to places wherever even the breeze has no access!

09 October, 2009



    Lucknow gharana kathak - Birju Maharaj