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Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 16 of 144

Krishna playing flute in Vrindavan, Venugeet

१६.
मन मोहनलाल बड़ो छलिया, सखि वारू की भीति उठावत है ।
कर तोरत है नभ की कलियाँ, चट बन्द के फन्द लगावत है ॥
जहँ पौंन न जाय सकै, मुरली धुनि की तहँ दूती पठावत है ।
कहूँ चोर कहूँ दधि दानी बनैं, कहूँ साह लली बनि आवत है ॥

This sawaiya verse says:

Krishna is very naughty.… He sends the music of his flute as a messenger to places wherever even the breeze has no access!

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