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Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 11 of 144

११.
नवनीत गुलाब से कोमल है ‘हठी’ कंज को मंजुलता इन में ।
गुललाला गुलाल प्रबाल जपा छबि ऐसी न देखी ललाइन में ॥
मुनि मानस मंदिर मध्य बसैं बस होत हैं सूधे सुभाइन में ।
रहु रे मन तू चित चाहन सों वृषभानु कुमारी के पाइन में ॥

This sawaiya verse from Vrindavan says: My mind, please stay at the feet of Vrushbhanu’s daughter Radha Rani.

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