Anandway: Blog

Roadmaps to joy!

Krishna bhajan – tum kaha chhupe bhagavan ho

तुम कहां छुपे भगवन हो, मधुसूदन हो, मोहन हो,

कहां ढूंढू रमा रमन हो, मेरे प्यारे मनमोहन हो

क्या छुपे क्षीरसागर में, या गोपिन की गागर में,

या छुपे भक्त-हृदय में, मेरे प्यारे मनमोहन हो

हो सांवरी सूरत वाले, इक बार दिखा दे झांकी,

है कसम तुम्हें राधा की, मेरे प्यारे मनमोहन हो

मेरे हृदय कुंज में आओ, बस आओ तो बस जाओ

आओ तो छुप जाओ, यहां प्रेम सुधा बरसाओ

यहां प्रेम सुधा बरसाओ, मेरे प्यारे मनमोहन हो

Meera Bai Bhajan – Sakhi ree mohe laage vrinavan neeko

आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको

निर्मल नीर बहत यमुना को, भोजन दूध दही को,

सखी सी मोहे लागे वृन्दावन नीको 

आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको

रतन सिंहासन आप विराजे, मुकुट धरे तुलसी को

आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको

कुंज�� कुंजन फिरत राधिका, शब्द सुनत मुरली को

आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको

मीरा के प्रभु गिरधर नागर, भजन बिना नर फीको

आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको

In this bhajan, Meera Bai sings and tells her friends that she loves Vrindavan. The clear waters of Yamuna flow through Vrindavan. There is an abundance of milk and ghee for food. Krishna is sitting on an ornate chair with a crown of tulsi (Holy Basil) leaves on his forehead. Radhika is going from one garden to another in search of Krishna. Meera says that there is no enjoyment in a human life like the one that is in devotion.

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