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Swami Haridas’s Ashtadash Sidhant, Verse 5, Raga Vilaaval

श्री कुंजविहारिणे नमः

॥ राग विलावल ॥

ए हरि! मोसौ न विगारन कौ, तोसो न संभारन कौ, मोहि तोहि परी होड़।

कौनधौ जीते कौनधौ हारें, पर बदी न छोड़॥

तुम्हारी माया बाजी विचित्र पसारी, मोहे मुनि सुनि भुले काके कोड़।

कहें श्री हरिदास हम जीते, हारे तुम, तो‍उ न तोड़॥५॥

Sri Haridas says, ‘O, Hari, I am competing with you. There is none who can mess up things more than me, and there is none who can make things alright as you can…. Even if I win, I am a loser in reality.’

Swami Sri Hariadas’s Ashtadash Sidhant, Verse 4, Raga Vibhas

श्री कुंजविहारिणे नमः

॥राग विभास॥

हरि भज हरि भज, छांडि न मान नर तन कौ।

मति वंछै मति वंछै रे, तिल तिल धन कौ।

अन मांग्यौ आगै आवेंगो, ज्यों पल पल लागै पल कौ।

कहें श्री हरिदास मीच ज्यों आवे, ज्यों धन है आपन कौ॥४॥

Swami Sri Haridas’s Ashtadash Sidhant, Verse 3, An ode to Sri Banke Bihari

श्री कुंजविहारिणे नमः

॥राग विभास॥

कबहूं कबहूं मन इत उत जात याते अब कौन अधिक सुख।

बहुत भांतिन घत आनि राख्यो नाहिंतौ पावतौ दुःख॥

कोटि काम लावण्य बिहारी ताके, मु���हाचुहीं सब सुख लिये रहत रुख।

श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी कों, दिन देखत रहौ विचित्र मुख॥

Sri Haridas ji says, ‘Many times the mind gets distracted but there is no pleasure in that. I bring it back to my center, else this mind would make me very unhappy. Sri Banke Bihari’s divine beauty is so enticing and the greatest of pleasures. With wonder and adoration I look at my masters Sri Radha Rani and Sri Krishna.’

Swami Sri Haridas’s Ashtadash Sidhant, Verse 2

श्री कुंजविहारिणे नमः

॥ राग विभास ॥

काहू को वश नाहि, तुम्हारी कृपा ते सब होई, बिहारी बिहारिनि।

और मिथ्या प्रपंच काहे को भाषिये, सोतौ है हारिनि॥

जाहि तुमसों हित तासों तुम हित करौ, सब सुख कारिनी।

श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी, प्राननि के आधारिनी॥२॥

Sri Haridas ji says, ‘Sri Krishna and Radha Rani, it is by your grace alone that everything gets done. It is pointless to discuss the complex cause and effects that are apparent, but not true. Whoever feels connected to you, you take care of them. You are my life.’

Sri Haridas’s song, Ashtadash Sidhant, Verse 1

श्री कुंजविहारिणे नमः

॥राग विभास॥

ज्योंही ज्योंही तुम राखत हौं, त्योंही त्योंही रहियत है हो हरि।

और तौ अचरचे पाई धरौ, सो तौ कहो कौन के पैड़ भरि॥

यद्यपि कीयो चाहौ अपनो मन भायौ, सौ तौ क्यौं करि सकौ ज्यों तुम राख्यौ पकरि।

कहें श्रीहरिदास पिंजरा को जनावर ज्यौं, फड़फड़ाय रह्यौ उड़िवे कों कितो‍ऊ करि॥१॥

Sri Haridas says to Sri Banke Bihari, ‘Hari, I live according to your wishes just as a caged animal cannot escape, no matter how much he wants to flee.’ Haridas ji surrenders to the Lord, saying, ‘I carry out your will alone. I have no personal wish other than your will. Just as a caged animal is at the mercy of its master, I am at your mercy and can do nothing without your will. You are my master, Hari.’

 

Ram bhajan, Sooraj ki garmi se jalte huye tan ko mil jaaye taruvar ki chhayaa

Ram bhajan by Sharma bandhu

Bhajan lyrics

जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुये तन को मिल जाये तरुवर की छाया

ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम

भटका हुआ मेरा मन था, कोई मिल ना रहा था सहारा

लहरों से लड़ती हुई नाव को जैसे मिल ना रहा हो किनार

उस लड़खड़ाती हुई नाव को ज्यों किसी ने किनारा दिखाया

ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम

सूरज की गर्मी से जलते हुये तन को मिल जाये तरुवर की छाया

शीतल बने आग चंदन के जैसी राघव कृपा हो जो तेरी

उजियाली पूनम की हो जायें रातें जो थी अमावस अंधेरी

युग युग से प्यासी मरु भूमि ने जैसे सावन का संदेस पाया

ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम

सूरज की गर्मी से जलते हुये तन को मिल जाये तरुवर की छाया

जिस राह की मंज़िल तेरा मिलन हो, उस पर कदम मैं बढ़ाऊं

फूलों में, ख़ारों में, पतझड़, बहारों में मैं ना कभी डगमगाऊ

पानी के प्यासे को जैसे तकदीर ने जी भर के अमृत पिलाया

ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम

सूरज की गर्मी से जलते हुये तन को मिल जाये तरुवर की छाया

जय एकादशी तुम्हारी, Vaishnav bhajan lyrics for Ekadashi vrat

A bhajan is a simple way of increasing in devotion to God. The rich Indian oral tradition was designed to embed joyous spirituality in the masses.

This is a beautiful Vaishnav bhajan to honour and remember the names and significance of different Ekadashi days in the calendar.

सब काल ईश की प्यारी, जय एकादशी तुम्हारी

सकल तिथिन की तुम हो रानी, वेद पुराण सबै बखानी

ब्रह्म रूप हो तुम निर्वाणी, दायक हो फल चारी

जय एकादशी तुम्हारी

उत्पन्ना, मोक्षदा स्वरूपा, सफला और पुत्रदा रूपा

नाम षडतिला परम अनूपा, जया नाम अघहारी

जय एकादशी तुम्हारी More...

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