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Aap ko dekh kar dekhta rah gaya, Ghazal by Jagjit Singh, video and lyrics

Ghazal lyrics by Wasim Barelavi

आपको देख कर देखता रह गया, क्या कहूं, और कहने को क्या रह गया

आते आते मेरा नाम सा रह गया, उसके होंठों पे कुछ कांपता रह गया

वो मेरे सामने ही गया, और मैं रास्ते की तरह देखता रह गया

झूठ वाले कहीं से कहीं बढ़ गये, और मैं था कि सच बोलता रह गया

Raskhan ke dohe, Sri Banke Bihari ke sawaiya, 48 of 144

४८.

खंजन नैन फंसे छवि पिंजर, नाहिं रहैं थिर कैसेहु माई।

छूटि गई कुल कानि सखी ‘रसखान’ लखी मुसकानि सुहाई॥

चित्र लिखी सी भई सब देह न वैन कढ़ै मुख दीन्हें दुहाई।

कैसी करूं जित जाऊं तितै सब बोलि उठैं वह बांवरी आई॥४८॥

Meaning of this sawaiya verse by  Raskhan

My eyes have been arrested by the all attractive sight of Krishna :-)

On seeing Krishna, the treasure of bliss, smile at me, I forget my social attachments. My state is such that I am still like a picture, my body is still, no words escape my lips. Wherever I go, people say, ‘O, she is crazy!’

Braj ke dohe, sawaiya, 47 of 144, Literature from Vrindavan

४७.

सोहत है चंदवा सिर मोर के तैसी ये सुन्दर पाग कसी है।

तैसी ये गोरज भाल विराजत तैसी हिये बनमाल लसी है॥

‘रसखान’ विलोकत बौरी भई दृग मूंदि के ग्वाल पुकारि हंसीहै।

खोलरी घूंघट खोलू कहा वह मूरति नैनन मांझ बसी है॥४७॥

Bhakti poet, Raskhan says: ‘Krishna is so attractive…He has a peacock feather tucked in his turban. His face is powdered with dust that settles down after clouds of dust are raised by his herd of cows walking in Vraj, and a beautiful garland of flowers from the jungle graces his chest. Seeing Krishna’s wonderful presence, i close my eyes in bliss. A cowherd boy laughs on seeing my state and asks me to wake up. I say, why should I open my eyes when wondrous Krishna is in my eyes. What else is there to see?’

This is Bhakti Yoga :-)

Braj ke dohe, sawaiya, 46 of 144

४६.

विछुरे पिय के जग सूनो भयो, अब का करिये कहि पेखिये का।

सुख छांडि के दर्शन को तुम्हरे इन तुच्छन को अब लेखिये का॥

‘हरिचन्द’ जो हीरन को ब्यवहार इन कांचन को लै परेखिये का।

जिन आंखिन में वह रूप बस्यो उन आंखन सों अब देखिये का॥४६॥

A Krishna devotee-poet of Vrindavan, Harichand says: When my beloved Lord is not visible, the world looks empty…now what is there to do or see? After seeing your bliss-giving presence, nothing else is more worthy of been seen.

After wearing diamonds, what is the point of inspecting pieces of glass?

The eyes which are blessed with your sight, have no need to see anything else anymore :-)

Sri Banke Bihari je ke sawaiya, 45 of 144

४५.

पांयन नूपुर मंजु बजैं कटि किंकिणि में धुनि की मधुराई।

सांवरे अंग लसै पटपीट हिये हुलसै वनमाल सुहाई॥

माथे किरीट बड़े दृग चंचल मंद हंसी मुखचन्द जुन्हाई।

जै जग मन्दिर दीपक सुन्दर श्री व्रजदूलह ‘देव’ सहाई॥४५॥

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 44 of 144

४४.

केहि पापसों पापी न प्राण चलैं अटके कित कौन विचारलयो।

नहिं जानि परै ‘हरिचन्द’ कछू विधि ने हमसों हठ कौन ठयो॥

निसि आज हू हाय बिहाय गई बिन दर्शन कैसे न जीव गयो।

हत भागिनी आंखन सों नित के दुख देखबे को फिर भोर भयो॥४४॥

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