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गुरु मात पिता, गुरु बंधु सखा, तेरे चरणों में स्वामी मेरे कोटि प्रणाम

गुरु मात पिता, गुरु बंधु सखा, तेरे चरणों में स्वामी मेरे कोटि प्रणाम

१. प्रियताम तुम्हीं, प्राणनाथ तुम्हीं, तेरे चरणों में स्वामी मेरे कोटि प्रणाम

२. तुम्हीं भक्ति हो, तुम्हीं शक्ति हो, तुम्हीं मुक्ति हो, मेरे सांब शिवा

३. तुम्हीं प्रेरणा, तुम्हीं  साधना, तुम्हीं आराधना मेरे सांब शिवा

४. तुम्हीं प्रेम हो, तुम्हीं करुणा हो, तुम्हीं मोक्ष हो मेरे सांब शिवा

गुरु मेरी पूजा Guru Govind Singh ji Shabad

जित बिठ्लावे तित ही बैठूं, जो पहरावे सोई सोई पहरूं

मेरी उनकी प्रात पुरानी, बेचे तो बिक जाऊं

गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंद, गुरु मेरो प्राणधन, गुरु भगवंत,

गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंत

१. गुरु बिन जीवन अलख अंधेरो, सर्व-पूज्य शरण गुरु तेरो

२. गुरु के दर्शन देख देख जीवा���, गुरु के चरण धोय धोय पीवां

३. गुरु मेरा ज्ञान, गुरु मेरा ध्यान, गुरु गोपाल, पूरण भगवान

Vrindavan bhajan for Sri Radha Rani

मेरे गिनियो ना अपराध, लाड़ली श्री राधे

मेरे गिनियो ना अपराध किशोरी श्री राधे

१. जो तुम मेरे अवगुन देखो, तो नाही कोई गुण हिसाब, लाड़ली श्री राधे

२. अष्ट सखी और कोटि गोपिन में, उनकी दासी को दासी मैं, लाड़ली श्री राधे

    वहीं लिख लीजो मेरो नाम, लाड़ली श्री राधे

३. माना कि मैं पतित बहुत हूं, हौ पतित पावन तेरो नाम, लाड़ली श्री राधे

    किशोरी मेरी श्री राधे, लाड़ली श्री राधे, स्वामिनी श्री राधे

Feeling grateful for the oral traditions of India :) My heritage.

Conflict And Innocence

Conflict And Innocence

Sri Sri Ravi Shankar: Fights can only happen among equals. When you fight with someone, you make them equal. But in reality there is no one at par with you. When you keep people either above or below you, then there is no fight. When they are above you, you respect them. When they are below you, you love them and you feel compassionate. Either submission or compassion can take you out of a fight in no time. This is one way to look at it when you are tired of fighting. When you are well rested, just fight and have fun.

The same is true of the mind. As long as the mind thinks it is equal to the senses, there is conflict. When it realizes that it is bigger than the senses, there is no conflict. And when the mind is smaller than the senses, like in animals, there is no conflict. When the mind is caught up in the senses, there is constant conflict. When it transcends the senses, it comes back to its true nature, which is innocence - in no sense.

Does this make sense? (Laughter)

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