January 30, 2012 10:14 by
anisha
जो तू है सो मैं हूं, जो मैं हूं सो तू है।
न कुछ आरज़ू है, न कुछ जुस्तजू है॥
बसा राम मुझ में, मैं अब राम में हूं।
न इक है, न दो हैं, सदा तू ही तू है॥
A beautiful ghazal sung by Ustad Nusrat Fateh Ali Khan. It has a deep spiritual fervour.
…रोज़ तौबा को तोड़ता हूं मैं, रोज़ नीयत ख़राब होती है…
…हम पियें तो सवाब बनती है
हम अपनी शाम को जब नज़र-ए-जाम करते हैं
अदब से हमको सितारें सलाम करते हैं
गले लगाते हैं दुशमन को भी सरूर में हम
बहुत बुरें हैं मगर नेक काम करते हैं…
April 26, 2010 12:16 by
anisha
A Sufi song by Nusrat Fateh Ali Khan
A request to the beloved Lord:
If I don’t get to see you always, please return my heart.