True love changes your vision of the world, says swami Ramtirtha

February 8, 2012 04:16 by anisha
  • जो शक्ति हम दूसरों की जांच-पड़ताल करने में नष्ट करते हैं, उसे हमें अपने आदर्श के अनुसार चलने में लगानी चाहिये।
  • वेदान्त के अनुसार, मानसिक एकाग्रता की विशेषता यह है कि हमें अपनी असली आत्मा को सूर्यों का सूर्य और प्रकाशों का प्रकाश अनुभव करना, साक्षात करना होता है।
  • जैसे को तैसा आकर मिलता है। आप यहीं, इसी क्षण ईश्वर के आनन्द को अपने भीतर अनुभव करो – सफलता का आनन्द अपने आप, आप की ओर खिंचता हुआ चला आयेगा।
  • सत्य को नष्ट नहीं किया जा सकता और असत्य कभी फल-फूल नहीं सकता।
  • जो मनुष्य सब के प्रति अभेदना की भावना से ओत-प्रोत होता है, उसका हृदय, निर्भयता, शक्ति तथा आध्यात्मक पवित्रता का केन्द्र बन जाता है।
  • सच्ची प्रीति और प्रेम जब उमड़ता है तो अन्धे को आंखें मिल जाने के समान होता है और दुनिया बदल जाती है।
  • सब पापों से बचने और सब प्रलोभनों से ऊपर उठने का एकमात्र उपाय है, अपने सत्य-स्वरूप आत्मा का अनुभव करना।

~ स्वामी रामतीर्थ


 


Swami Ramtirtha’s message on Love and Sacrifice

February 8, 2012 04:02 by anisha
  • विषय वासना-हीन प्रेम ही आध्यात्मिक प्रकाश है।
  • प्रेम का अर्थ है, व्यवहार में अपने पड़ोसियों के साथ, उन लोगों के साथ जिनसे आप मिलते जुलते हैं, एकता और अभेदना का अनुभव करना।
  • कामना रहित कर्म ही सर्वोत्तम त्याग अथवा पूजा है।
  • अहंकार-पूर्ण जीवन को छोड़ देना ही त्याग है, और वही सौंदर्य है।
  • एक-एक में और सब में ईश्वरत्व का भान करना ही वेदान्त के अनुसार त्याग है।
  • त्याग के अतिरिक्त और कहीं वास्तविक आनन्द नहीं मिल सकता; त्याग के बिना न तो ईश्वर-प्रेरणा हो सकती है, न प्रार्थना।
  • सच्चा प्रेम, सूर्य के समान, आत्मा को विकसित कर देता है – मोह मन को पाले के समान ठिठुराकर संकुचित कर डालता है।
  • प्रेम को मोह मत समझो – प्रेम और है, मोह और है – इन्हें एक समझना भारी भूल है।
  • प्रेम का अर्थ है सौंदर्य का दर्शन करना।

~ स्वामी रामतीर्थ

 


 


Richard Bach, Illusions, quote 2

January 21, 2012 06:33 by anisha

I do not enjoy writing at all. If I can turn my back on an idea, out there in the dark, if I can avoid opening the door to it, I won’t even reach for a pencil.

But once in a while there’s a great dynamite burst of flying glass and brick and splinters through the front wall and somebody stalks over the rubble, siezes me by the throat an dgently says, ‘I will not let you go until you set me in words on paper.’ That’s how I met ‘Illusion’.


 


Richard Bach, Illusions, quote 1

January 21, 2012 06:28 by anisha

What if someone came along who could teach me how my world works and how to control it? What if a Siddharth or a Jesus came into our time, with power over the illusions of the world because he knew the reality behind them? And what if I could meet him in person…


 


Route to Peace of mind

September 14, 2010 21:29 by nitin

Peace

Righteousness can be practiced only when we have freed our mind from passions of egotism. Perfect peace can dwell only where all vanity has disappeared .

~ Buddha


 


Happy Journey :)

February 5, 2009 22:08 by Nitin