January 21, 2012 12:13 by
anisha
हरा रंग डारो, गुलाबी रंग डारो, बसंती बचा के
१. तुम तो कान्हा बड़े नटखट हो, मेरा गजरा बचा के, मेरी बिंदिया बचा के
हरा रंग डारो…
२. तुम तो कान्हा कहा नहीं मानो, मेरी चूड़ियां बचा के, मेरी मेंहदी बचा के
हरा रंग डारो…
३. तुम तो कान्हा बड़े रंग रसिया, मेरा हरवा बचा के, मेरी चुनरी बचा के
हरा रंग डारो…
४. तुम तो कान्हा बड़े हरजाई, मेरी पायल बचा के, मेरा बिछुआ बचा के
हरा रंग डारो
April 29, 2011 23:45 by
anisha
तुम कहां छुपे भगवन हो, मधुसूदन हो, मोहन हो,
कहां ढूंढू रमा रमन हो, मेरे प्यारे मनमोहन हो
क्या छुपे क्षीरसागर में, या गोपिन की गागर में,
या छुपे भक्त-हृदय में, मेरे प्यारे मनमोहन हो
हो सांवरी सूरत वाले, इक बार दिखा दे झांकी,
है कसम तुम्हें राधा की, मेरे प्यारे मनमोहन हो
मेरे हृदय कुंज में आओ, बस आओ तो बस जाओ
आओ तो छुप जाओ, यहां प्रेम सुधा बरसाओ
यहां प्रेम सुधा बरसाओ, मेरे प्यारे मनमोहन हो
April 29, 2011 23:36 by
anisha
आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको
निर्मल नीर बहत यमुना को, भोजन दूध दही को,
सखी सी मोहे लागे वृन्दावन नीको
आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको
रतन सिंहासन आप विराजे, मुकुट धरे तुलसी को
आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको
कुंजन कुंजन फिरत राधिका, शब्द सुनत मुरली को
आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, भजन बिना नर फीको
आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको
In this bhajan, Meera Bai sings and tells her friends that she loves Vrindavan. The clear waters of Yamuna flow through Vrindavan. There is an abundance of milk and ghee for food. Krishna is sitting on an ornate chair with a crown of tulsi (Holy Basil) leaves on his forehead. Radhika is going from one garden to another in search of Krishna. Meera says that there is no enjoyment in a human life like the one that is in devotion.
November 15, 2010 01:07 by
anisha
Krishna bhajan by unknown artist
नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा
सब देवों में देव बड़े हैं, श्याम बिहारी नंदा
भजो रे मन गोविंदा
नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा
सब सखियों में राधा बड़ी हैं, जैसे तारों में चंदा More...
October 25, 2010 10:35 by
anisha
४८.
खंजन नैन फंसे छवि पिंजर, नाहिं रहैं थिर कैसेहु माई।
छूटि गई कुल कानि सखी ‘रसखान’ लखी मुसकानि सुहाई॥
चित्र लिखी सी भई सब देह न वैन कढ़ै मुख दीन्हें दुहाई।
कैसी करूं जित जाऊं तितै सब बोलि उठैं वह बांवरी आई॥४८॥
Meaning of this sawaiya verse by Raskhan
My eyes have been arrested by the all attractive sight of Krishna :-)
On seeing Krishna, the treasure of bliss, smile at me, I forget my social attachments. My state is such that I am still like a picture, my body is still, no words escape my lips. Wherever I go, people say, ‘O, she is crazy!’
October 16, 2010 12:21 by
anisha
४६.
विछुरे पिय के जग सूनो भयो, अब का करिये कहि पेखिये का।
सुख छांडि के दर्शन को तुम्हरे इन तुच्छन को अब लेखिये का॥
‘हरिचन्द’ जो हीरन को ब्यवहार इन कांचन को लै परेखिये का।
जिन आंखिन में वह रूप बस्यो उन आंखन सों अब देखिये का॥४६॥
A Krishna devotee-poet of Vrindavan, Harichand says: When my beloved Lord is not visible, the world looks empty…now what is there to do or see? After seeing your bliss-giving presence, nothing else is more worthy of been seen.
After wearing diamonds, what is the point of inspecting pieces of glass?
The eyes which are blessed with your sight, have no need to see anything else anymore :-)
October 7, 2010 12:54 by
anisha
४५.
पांयन नूपुर मंजु बजैं कटि किंकिणि में धुनि की मधुराई।
सांवरे अंग लसै पटपीट हिये हुलसै वनमाल सुहाई॥
माथे किरीट बड़े दृग चंचल मंद हंसी मुखचन्द जुन्हाई।
जै जग मन्दिर दीपक सुन्दर श्री व्रजदूलह ‘देव’ सहाई॥४५॥