January 22, 2012 01:27 by
nitin
श्याम मने चाकर राखो जी,
चाकर रहसूं, बाग लगासूं नित उठ दर्सन पासूं
बृंदाबन की कुंज गलिन में तेरी लीला गासूं
श्याम मने चाकर राखो जी,
चाकरी में दर्सन पाऊं, सुमिरन पाऊं खरची
भाव भक्ति जागीरी पाऊं, तीनों बातां सरसी
श्याम मने चाकर राखो जी,
मोर मुकुट पीतांबर सोहे, गल बैजन्ती माला
बृन्दावन में धेनु चरावे मोहन मुरली वाला
श्याम मने चाकर राखो जी,
मीरा के प्रभु गहिर गंभीरा सदा रहो जी धीरा
आधी रात प्रभु दर्सन दीन्हें प्रेम नदी के तीरा
श्याम मने चाकर राखो जी
January 21, 2012 12:13 by
anisha
हरा रंग डारो, गुलाबी रंग डारो, बसंती बचा के
१. तुम तो कान्हा बड़े नटखट हो, मेरा गजरा बचा के, मेरी बिंदिया बचा के
हरा रंग डारो…
२. तुम तो कान्हा कहा नहीं मानो, मेरी चूड़ियां बचा के, मेरी मेंहदी बचा के
हरा रंग डारो…
३. तुम तो कान्हा बड़े रंग रसिया, मेरा हरवा बचा के, मेरी चुनरी बचा के
हरा रंग डारो…
४. तुम तो कान्हा बड़े हरजाई, मेरी पायल बचा के, मेरा बिछुआ बचा के
हरा रंग डारो
April 29, 2011 23:36 by
anisha
आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको
निर्मल नीर बहत यमुना को, भोजन दूध दही को,
सखी सी मोहे लागे वृन्दावन नीको
आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको
रतन सिंहासन आप विराजे, मुकुट धरे तुलसी को
आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको
कुंजन कुंजन फिरत राधिका, शब्द सुनत मुरली को
आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, भजन बिना नर फीको
आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको
In this bhajan, Meera Bai sings and tells her friends that she loves Vrindavan. The clear waters of Yamuna flow through Vrindavan. There is an abundance of milk and ghee for food. Krishna is sitting on an ornate chair with a crown of tulsi (Holy Basil) leaves on his forehead. Radhika is going from one garden to another in search of Krishna. Meera says that there is no enjoyment in a human life like the one that is in devotion.
February 24, 2011 06:38 by
anisha
रंग मैं होरी कैसे खेलूंगी जा सांवरिया के संग
कोरे कोरे कलस मंगाये, वा मे घोला रंग, भर पिचकारी सम्मुख मारी, चोली हो गई तंग
रंग मैं होरी कैसे…
तबला बाजे, सरंगी बाजे, और बाजे मिरदंग, कान्हा जी की मुरली बाजे, राधा जी के संग
रंग मैं होरी कैसे…
इत ते आई राधा प्यारी सब सखियन के संग, उत ते आये कुंवर कन्हाई ग्वाल बाल के संग
रंग मैं होरी कैसे…
अबीर उड़त, गुलाल उड़त, उड़ते सातों रंग, भर पिचकारी सम्मुख मारी, भीज गयो सब अंग
रंग मैं होरी कैसे…
बरसाने से रंग मंगाया, नंदगांव से भंग, सांवरिया संग ऐसी नाची देखत रह गये दंग
रंग मैं होरी कैसे…
February 24, 2011 06:25 by
anisha
उत मत जा, ठाड़ो मुकुटवारो उत मत जा…
द्वारपाल सब सखा साथ में, घूम रह्यो मतवारो रे, उत मत जा…
अबीर-गुलाल के बादल छाये, उड़ रह्यो रंग टेसुवा रे, उत मत जा…
जाइत रोकत ताके नवेली, तक पिचकारी श्याम मारी, उत मत जा…
मैके गई सौभाग्यवती रे, रमण पिया मोहे रंग डारो, उत मत जा…
This song depicts a scene from the festival of Holi in Vrindavan, India:
There are clouds of colours all around. Krishna is playing Holi very enthusiastically, colouring anyone who comes his way! He looks out for the gopis and sprays them with colour. A Gopi is a master of the path of devotion, according to Narad Bhakti Sutra and other scriptures.
November 25, 2010 03:26 by
anisha
५०.
हेलो री मैं लख्यो आजु को खेल बखान कहां लौ करे मत मोरी।
राधे के सीस पै मोर पखा मुरली लकुटी कटि में पट डोरी॥
बेनी विराजत लाल के भाल ओ चूनर रंग कसूम में बोरी।
मान के मोहन बैठि रहे सो मनावति श्री वृषभान किसोरी॥५०॥
November 11, 2010 03:54 by
anisha
॥ रागनी आसावरी ॥
वंदे अख्त्यार भला।
चित न डुलाव आव समाधि भीतर न होहु अगला॥
न फिर दर दर पिदर दर न होअहु अंधला।
कहें श्री हरिदास करता कीया सो हुआ सुमेरू अचल चला॥६॥
