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Vrindavan bhajan for Sri Radha Rani

मेरे गिनियो ना अपराध, लाड़ली श्री राधे

मेरे गिनियो ना अपराध किशोरी श्री राधे

१. जो तुम मेरे अवगुन देखो, तो नाही कोई गुण हिसाब, लाड़ली श्री राधे

२. अष्ट सखी और कोटि गोपिन में, उनकी दासी को दासी मैं, लाड़ली श्री राधे

    वहीं लिख लीजो मेरो नाम, लाड़ली श्री राधे

३. माना कि मैं पतित बहुत हूं, हौ पतित पावन तेरो नाम, लाड़ली श्री राधे

    किशोरी मेरी श्री राधे, लाड़ली श्री राधे, स्वामिनी श्री राधे

Feeling grateful for the oral traditions of India :) My heritage.

Meera Bai bhajan by Vani Jairam, Shyam mane chaakar raakho ji

श्याम मने चाकर राखो जी,

चाकर रहसूं, बाग लगासूं नित उठ दर्सन पासूं

बृंदाबन की कुंज गलिन में तेरी लीला गासूं

श्याम मने चाकर राखो जी,

चाकरी में दर्सन पाऊं, सुमिरन पाऊं खरची

भाव भक्ति जागीरी पाऊं, तीनों बातां सरसी

श्याम मने चाकर राखो जी,

मोर मुकुट पीतांबर सोहे, गल बैजन्ती माला

बृन्दावन में धेनु चरावे मोहन मुरली वाला

श्याम मने चाकर राखो जी,

मीरा के प्रभु गहिर गंभीरा सदा रहो जी धीरा

आधी रात प्रभु दर्सन दीन्हें प्रेम नदी के तीरा

श्याम मने चाकर राखो जी

Holi rasiya, Mat maaro nainan ki chot rasiya

मत मारो नैनन की चोट, रसिया…

होरी में मोहे लग जायेगी

१. मैं तो नारि पराये घर की, पराये घर की, पराये घर की

तुम तो बड़े वो हो, हो रसिया, होरी में मोहे लग जायेगी

२. अब की बार बचाय गयी मैं, बचाय गयी मैं, बचाय गयी मैं

कर घंघटे की ओट, रसिया, होरी में मोहे लग जायेगी

३. मैं तो भरी लाज की मारी, लाज की मारी, हां लाज की मारी

तुम हो बड़े चितचोर, रसिया, होरी में मोहे लग जायेगी

४. रसिक गोवंद वहीं जाय खेलो, वहीं जाय खेलो, वहीं जाय खेलो

जहां तुम्हारी जोड़, रसिया, होरी में मोहे लग जायेगी

Playful Govind, go and play with your equal (Radha).

Krishna bhajan – tum kaha chhupe bhagavan ho

तुम कहां छुपे भगवन हो, मधुसूदन हो, मोहन हो,

कहां ढूंढू रमा रमन हो, मेरे प्यारे मनमोहन हो

क्या छुपे क्षीरसागर में, या गोपिन की गागर में,

या छुपे भक्त-हृदय में, मेरे प्यारे मनमोहन हो

हो सांवरी सूरत वाले, इक बार दिखा दे झांकी,

है कसम तुम्हें राधा की, मेरे प्यारे मनमोहन हो

मेरे हृदय कुंज में आओ, बस आओ तो बस जाओ

आओ तो छुप जाओ, यहां प्रेम सुधा बरसाओ

यहां प्रेम सुधा बरसाओ, मेरे प्यारे मनमोहन हो

Meera Bai Bhajan – Sakhi ree mohe laage vrinavan neeko

आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको

निर्मल नीर बहत यमुना को, भोजन दूध दही को,

सखी सी मोहे लागे वृन्दावन नीको 

आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको

रतन सिंहासन आप विराजे, मुकुट धरे तुलसी को

आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको

कुंजन कुंजन फिरत राधिका, शब्द सुनत मुरली को

आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको

मीरा के प्रभु गिरधर नागर, भजन बिना नर फीको

आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको

In this bhajan, Meera Bai sings and tells her friends that she loves Vrindavan. The clear waters of Yamuna flow through Vrindavan. There is an abundance of milk and ghee for food. Krishna is sitting on an ornate chair with a crown of tulsi (Holy Basil) leaves on his forehead. Radhika is going from one garden to another in search of Krishna. Meera says that there is no enjoyment in a human life like the one that is in devotion.

Holi song lyrics from Vrindavan मोरी चुनरी में लग गयो दाग़ री, कैसो चटक रंग डारो, श्याम…

मोरी चुनरी मे लग गयो दाग री, कैसो चटक रंग डारो, श्याम…

औरन को अचरा ना छुअत है, या को मोही सो लग रही लाग री,

कैसो चटक रंग डारो, श्याम…

मोसो कहत, ओ सुंदर नारी, यो तो मोही से खेलो फाग री,

कैसो चटक रंग डारो, श्याम…

बलि बलि दास, आस ब्रज छोड़ो, ऐसी होरी में लग जाये आग री,

कैसो चटक रंग डारो, श्याम…

मेरी चुनरिया ऐसी कोरी, वा रसिया ने रंग में बोरी,

कैसे छूटोगो वाको दाग़ री, कैसे चटक डारो, श्याम…

चन्द्रसखी भज बालकृष्ण छवि, बड़े भाग सो फागुन आयो री,

कैसो चटक रंग डारो, श्याम…

मोरी चुनरी में लग गयो दाग़ री, कैसो चटक रंग डारो, श्याम…

Kaliya Nag and Krishna, in a poem from Vrindavan, Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 49 of 144

४९.

कारेइ मोहन कारेइ सोहन, कारी कालेन्दजा के तट आयो।

खेलत गेंद गिरी दह में तब कारे से नाग लो जाय जगायो॥

नाग को नाथ लियो छिन में अरु कारे के सीस पै नृत्य करायो।

‘गोविंद’ यों प्रभु शोभा बखानत कारे कौ नाथ के नाथ कहायो॥४९॥

This Sawaiya verse depicts the episode of Kaliya-manthan in Vrindavan. Poet Govid says:

“Krishna was playing with a ball with his friends on the banks of dark, deep waters of River Yamuna, when his ball fell into Kaliya-dah, a part of the river where Kaliya Nag, the thousand-headed snake lived. Krishna fought with Kaliya and emerged victorious, dancing on Kaliya’s heads. I cannot describe in words the awesome scene…”

Kaliya Nag is a symbol of the 5 senses, and the episode signifies that the master of the senses should be Krishna, else the waters of life would be poisoned by the craving and misery that the senses are capable of bringing, just like the presence of Kaliya Nag in Kaliya-dah, Vrindavan, poisoned the fresh river water.

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