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Roadmaps to joy!

Vrindavan bhajan for Sri Radha Rani

मेरे गिनियो ना अपराध, लाड़ली श्री राधे

मेरे गिनियो ना अपराध किशोरी श्री राधे

१. जो तुम मेरे अवगुन देखो, तो नाही कोई गुण हिसाब, लाड़ली श्री राधे

२. अष्ट सखी और कोटि गोपिन में, उनकी दासी को दासी मैं, लाड़ली श्री राधे

    वहीं लिख लीजो मेरो नाम, लाड़ली श्री राधे

३. माना कि मैं पतित बहुत हूं, हौ पतित पावन तेरो नाम, लाड़ली श्री राधे

    किशोरी मेरी श्री राधे, लाड़ली श्री राधे, स्वामिनी श्री राधे

Feeling grateful for the oral traditions of India :) My heritage.

Longing and Love (a story from Srimad Bhagwatam, shared by Sri Sri Ravi Shankar)

It happened 5000 yrs ago, when Lord Krishna sent Uddhava, who was his close associate and a very wise man with so much of wisdom of many techniques and meditation to the place of gopis and gopas, who were full of devotion, always singing and dancing. So, he went to give them some wisdom, to talk about liberation, but none of them were interested in listening to that. They all said, “no, tell us some story about Lord Krishna, tell us what is happening in Dwarka, where he is. We don’t want to hear all this wisdom, etc. you can keep that to yourself. But tell us what news you have of Lord Krishna? Come let’s sing and dance. We have heard enough of wisdom, now is the celebration time.

We have longing and love, and nothing else. We don’t care for the wisdom, we are happy with longing and we are happy with love. The gopis were being offered the highest wisdom by Uddhava, but all they wanted to do was to sing and dance in their love for Lord Krishna.

See how love makes you crazy! But it is good to be crazy, at least sometimes in life. That’s when all the boundaries drop; you feel one with everyone around, and one with the whole universe-and that’s called- ‘Guru tattva’.

Meera Bai bhajan by Vani Jairam, Shyam mane chaakar raakho ji

श्याम मने चाकर राखो जी,

चाकर रहसूं, बाग लगासूं नित उठ दर्सन पासूं

बृंदाबन की कुंज गलिन में तेरी लीला गासूं

श्याम मने चाकर राखो जी,

चाकरी में दर्सन पाऊं, सुमिरन पाऊं खरची

भाव भक्ति जागीरी पाऊं, तीनों बातां सरसी

श्याम मने चाकर राखो जी,

मोर मुकुट पीतांबर सोहे, गल बैजन्ती माला

बृन्दावन में धेनु चरावे मोहन मुरली वाला

श्याम मने चाकर राखो जी,

मीरा के प्रभु गहिर गंभीरा सदा रहो जी धीरा

आधी रात प्रभु दर्सन दीन्हें प्रेम नदी के तीरा

श्याम मने चाकर राखो जी

Holi rasiya, Mat maaro nainan ki chot rasiya

मत मारो नैनन की चोट, रसिया…

होरी में मोहे लग जायेगी

१. मैं तो नारि पराये घर की, पराये घर की, पराये घर की

तुम तो बड़े वो हो, हो रसिया, होरी में मोहे लग जायेगी

२. अब की बार बचाय गयी मैं, बचाय गयी मैं, बचाय गयी मैं

कर घंघटे की ओट, रसिया, होरी में मोहे लग जायेगी

३. मैं तो भरी लाज की मारी, लाज की मारी, हां लाज की मारी

तुम हो बड़े चितचोर, रसिया, होरी में मोहे लग जायेगी

४. रसिक गोवंद वहीं जाय खेलो, वहीं जाय खेलो, वहीं जाय खेलो

जहां तुम्हारी जोड़, रसिया, होरी में मोहे लग जायेगी

Playful Govind, go and play with your equal (Radha).

Holi song lyrics from Vrindavan, Mai holi kaise kheloongi jaa saavariyaa ke sang

रंग मैं होरी कैसे खेलूंगी जा सांवरिया के संग

कोरे कोरे कलस मंगाये, वा मे घोला रंग, भर पिचकारी सम्मुख मारी, चोली हो गई तंग

रंग मैं होरी कैसे…

तबला बाजे, सरंगी बाजे, और बाजे मिरदंग, कान्हा जी की मुरली बाजे, राधा जी के संग

रंग मैं होरी कैसे…

इत ते आई राधा प्यारी सब सखियन के संग, उत ते आये कुंवर कन्हाई ग्वाल बाल के संग

रंग मैं होरी कैसे…

अबीर उड़त, गुलाल उड़त, उड़ते सातों रंग, भर पिचकारी सम्मुख मारी, भीज गयो सब अंग

रंग मैं होरी कैसे…

बरसाने से रंग मंगाया, नंदगांव से भंग, सांवरिया संग ऐसी नाची देखत रह गये दंग

रंग मैं होरी कैसे…

Holi song from Vrindavan, Ut mat jaa thaado Mukutvaaro

उत मत जा, ठाड़ो मुकुटवारो उत मत जा…

द्वारपाल सब सखा साथ में, घूम रह्यो मतवारो रे, उत मत जा…

अबीर-गुलाल के बादल छाये, उड़ रह्यो रंग टेसुवा रे, उत मत जा…

जाइत रोकत ताके नवेली, तक पिचकारी श्याम मारी, उत मत जा…

मैके गई सौभाग्यवती रे, रमण पिया मोहे रंग डारो, उत मत जा…

This song depicts a scene from the festival of Holi in Vrindavan, India:

There are clouds of colours all around. Krishna is playing Holi very enthusiastically, colouring anyone who comes his way! He looks out for the gopis and sprays them with colour. A Gopi is a master of the path of devotion, according to Narad Bhakti Sutra and other scriptures.

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