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Roadmaps to joy!

और राग सब बने बराती, दूल्हा राग बसंत, Raga Basant by Pandit Jasraj

और राग सब बने बराती, दूल्हा राग बसंत

मदन महोत्सव आज सखी री अब, विदा भयो हेमंत

सहचर गान करत ऊंचे स्वर, कोकिल बोले असंख्य

गावत नारी पंचम स्वर ऊंचे स्वर, ऐसो गीत अनंत

कृष्ण दास स्वामिन बड़भागिन, मिल्यो है भावतो…

Raag Multani by Pandit Jasraj, Sakhi Kanha bin kachhu soojhat naahi


सखी, कान्हा बिन कछु सूझत नाहीं…

कित वे मुरली, कित कदम्ब की छैया…

Says Radha Rani to her companions, ‘Without Kanha, I am listless… Where is his flute, where is the shade of the Kadamb tree where he played upon the flute?’

कित वे पीत वसन, कित वे त्रिभंगी, नयन कछु ना दीखत सखी

Where are his yellow garments. Where is Krishna, who stands in a tribhangi pose. I don’t see him. More...

Surdas bhajan lyrics, Sabse oonchi prem sagaai

सबसे ऊंची प्रेम सगाई

१. दुर्योधन के मेवा त्याग्यो, साग विदुर घर खाई

४. जूठे फल शबरी के खाये, बहु विधि स्वाद बताई

३. राजसूय यज्ञ युधिष्ठिर कीन्हा, तामे जूठ उठाई

५. प्रेम के बस पारथ रथ हांक्यो, भूल गये ठकुराई

६. ऐसी प्रीत बढ़ी वृन्दावन, गोपियन नाच नचाई

२. प्रेम के बस नृप सेवा कीन्हीं, आप बने हरि नाई

७. सूर क्रूर एहि लायक नाहीं, केहि लगो करहुं बड़ाई

Surdas was one of the Ashtsakha (8 friends of Krishna), appointed by Mahaprabhu Vallabhacharya ji to perform Raga seva to Sri Govardhan Nath ji (the Krishna deity, uncovered by Mahaprabhu ji on Govardhan Hill near Vrindavan, Mathura.

Pandit Jasraj sings Sab se oonchi prem sagaai

Pandit Jasraj, Raga Gurjari Todi – चलो सखी सौतन के घर ज‍इहें

चलो सखी सौतन के घर ज‍इहें

मान घटे तो का घट ज‍इहे, पी के दर्सन प‍इहें

ये जोवन अंजुरी को पानी, समो गये पछ्तैये

प्रभु दरश परस कर मन की तपत बुझ‍इहें

चलो सखी सौतन के घर ज‍इहें

मान घटे तो का घट ज‍इहे, पी के दर्सन प‍इहें

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