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Raskhan ke dohe, Sri Banke Bihari ke sawaiya, 48 of 144

४८.

खंजन नैन फंसे छवि पिंजर, नाहिं रहैं थिर कैसेहु माई।

छूटि गई कुल कानि सखी ‘रसखान’ लखी मुसकानि सुहाई॥

चित्र लिखी सी भई सब देह न वैन कढ़ै मुख दीन्हें दुहाई।

कैसी करूं जित जाऊं तितै सब बोलि उठैं वह बांवरी आई॥४८॥

Meaning of this sawaiya verse by  Raskhan

My eyes have been arrested by the all attractive sight of Krishna :-)

On seeing Krishna, the treasure of bliss, smile at me, I forget my social attachments. My state is such that I am still like a picture, my body is still, no words escape my lips. Wherever I go, people say, ‘O, she is crazy!’

Braj ke dohe, sawaiya, 46 of 144

४६.

विछुरे पिय के जग सूनो भयो, अब का करिये कहि पेखिये का।

सुख छांडि के दर्शन को तुम्हरे इन तुच्छन को अब लेखिये का॥

‘हरिचन्द’ जो हीरन को ब्यवहार इन कांचन को लै परेखिये का।

जिन आंखिन में वह रूप बस्यो उन आंखन सों अब देखिये का॥४६॥

A Krishna devotee-poet of Vrindavan, Harichand says: When my beloved Lord is not visible, the world looks empty…now what is there to do or see? After seeing your bliss-giving presence, nothing else is more worthy of been seen.

After wearing diamonds, what is the point of inspecting pieces of glass?

The eyes which are blessed with your sight, have no need to see anything else anymore :-)

Sri Banke Bihari je ke sawaiya, 45 of 144

४५.

पांयन नूपुर मंजु बजैं कट�� किंकिणि में धुनि की मधुराई।

सांवरे अंग लसै पटपीट हिये हुलसै वनमाल सुहाई॥

माथे किरीट बड़े दृग चंचल मंद हंसी मुखचन्द जुन्हाई।

जै जग मन्दिर दीपक सुन्दर श्री व्रजदूलह ‘देव’ सहाई॥४५॥

Krishna Govinda Art of Living Bhajan by Rishi Nityapragya

गोविंद श्याम राधे कृष्णः

कृष्ण गोविंदा, गोविंदा गोविंदा

गोविंद श्याम राधे कृष्णः

गोविंद गोविंद परमानंद आनंदा

यशोदा का आनंद कृष्णः

नंद लालना कृष्णः मनमोहना कृष्णः

केशवा माधवा यदुनंद नंदना

कृष्णः गोविंदा,  गोविंदा गोविंदा…

Radha Krishna aarti video and lyrics from Rangeeli Mahal, Barsana

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

दुहुन सिर कनक मुकुट छलके

दुहुन श्रुति कुण्डल भल हलके

दुहुन दृग प्रेम सुधा छलके

चसीले बैन, रसीले नैन, गसीले सैन

दुहुन मैनन मनहारी की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

दुहुनि दृग चितवनि पर वारी

दुहुनि लट लटिकनि छवि न्यारी

दुहुनि भौं मटकनि अति प्यारी

रसन मुख पान, हंसन मुस्कान, दसन दमकान

दुहुनि बेसर छवि न्यारी की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

एक उर पीतांबर फहरे, एक उर नीलांबर लहरे

दुहुन उर लर मोतिन छहरे

कनकानन कनक, किंकिनी झनक, नुपुरन भनक

दुहुन रुन झुन धुनि प्यारी की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

एक सिर मोर मुकुट राजे

एक सिर चूनर छवि साजे

दुहुन सिर तिरछे भल भ्राजे

संग ब्रजबाल, लाडली लाल, बांह गल डाल

‘कृपालु’ दुहुन दृग चारि की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

Krishna bhajan, Bhoolu na yaad tumhaari suno Banvari

Krishna bhajan lyrics, Bhoolu na yaad tumhaari suno Banwari

भूलूं ना याद तुम्हारी सुनो बनवारी, कि जिया घबराय रहा रे

मेरे मन में उठी है उमंग रे, होरी खेलूं श्याम तोरे संग रे

श्याम रंग भरी पिचकारी तान मोहे मारी, भिजोय मोरी सारी

कि जिया हर्षाय रहा रे More...

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