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Surdas bhajan lyrics, Sabse oonchi prem sagaai

सबसे ऊंची प्रेम सगाई

१. दुर्योधन के मेवा त्याग्यो, साग विदुर घर खाई

४. जूठे फल शबरी के खाये, बहु विधि स्वाद बताई

३. राजसूय यज्ञ युधिष्ठिर कीन्हा, तामे जूठ उठाई

५. प्रेम के बस पारथ रथ हांक्यो, भूल गये ठकुराई

६. ऐसी प्रीत बढ़ी वृन्दावन, गोपियन नाच नचाई

२. प्रेम के बस नृप सेवा कीन्हीं, आप बने हरि नाई

७. सूर क्रूर एहि लायक नाहीं, केहि लगो करहुं बड़ाई

Surdas was one of the Ashtsakha (8 friends of Krishna), appointed by Mahaprabhu Vallabhacharya ji to perform Raga seva to Sri Govardhan Nath ji (the Krishna deity, uncovered by Mahaprabhu ji on Govardhan Hill near Vrindavan, Mathura.

Pandit Jasraj sings Sab se oonchi prem sagaai

Hindi bhajan lyrics, Radhe ka naam hai anmol

राधे का नाम है अनमोल, रटे जा राधे राधे

१. गैया भी बोले राधे, बछड़े भी बोले राधे, दूध की धार से आवाज़ आये राधे राधे

२. गोकुल में राधे राधे, मथुरा में राधे राधे, वृन्दावन रजकण से आवाज़ आये राधे राधे

३. गोपी भी बोले राधे, ग्वाले भी बोलें राधे, कान्हा की बंसी से आवाज़ आये राधे राधे

४. गंगा भी बोले राधे, सरजू भी बोले राधे, यमुना की लहरों से आवाज़ आये राधे राधे

५. भक्त भी बोलें राधे, संत भी बोलें राधे, सांसों की तार से आवाज़ आये राधे राधे

६. ढ़ोलक भी बोले राधे, झांझर भी बोले राधे, हृदय के भीतर से आवाज़ आये राधे राधे

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 36 of 144, राधिका जू प्रगटी जब ते तब ते तुम केलि कलानिधि पाई

३६.

सूकर ह्वै कब रास रच्यो अरु बावन ह्वै कब गोपी नचाईं।

मीन ह्वै कोन के चीर हरे कछुआ बनि के कब बीन बजाई॥

ह्वै नरसिंह कहो हरि जू तुम कोन की छातन रेख लगाई।

राधिका जू प्रगटी जब ते तब ते तुम केलि कलानिधि पाई॥

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 35 of 144

Sri Govind Dev ji, Jaipur

३५.

मन में बसी बस चाह यही प्रिय नाम तुम्हारा उचारा करूं।

बिठला के तुम्हें मन मंदिर में मन मोहन रूप निहारा करूं॥

भर के दृग पात्र में प्रेम का जल पद पंकज नाथ पखारा करूं।

बन प्रेम पुजारी तुम्हारा प्रभो नित आरती भव्य उतारा करूं॥

Narayan Narayan Jai Jai Govind Hare – Art of Living bhajan

This video shows Art of living’s Bangalore ashram.

Lyrics of bhajan: Narayan Narayan Jai Jai Govind Hare

नारायण नारायण, जय जय गोविंद हरे

नारायण नारायण, जय जय गोपाल हरे

जय जय गोविंद हरे, जय जय गोपाल हरे

नारायण नारायण नारायण नारायण नारायण…

Mhara ghat maa viraajataa Shrinathji – a Gujarati bhajan from Pushti Sampraday

This is a Gujarati bhajan, invoking the presence of Shrinath ji (Krishna) in one’s  life. Realising the grace and presence of the Lord and surrendering to the beloved through Bhakti-yoga.

It is a popular song in the Vaishnav Pushti Sampradaay, which was established by Mahaprabhu Vallabhacharaya about 500 years ago.

The chief deity of Pushtimarg is Shri Govardhan Nath ji (the name is shortened to Shrinathji or Shriji, with love). Shri Govardhan Nath ji was found by Vallabhcharya ji at Govardhan Hill, near Vrindavan (district Mathura), and moved to Nathdwara in Rajasthan some years later.

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