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Roadmaps to joy!

Raag Multani by Pandit Jasraj, Sakhi Kanha bin kachhu soojhat naahi


सखी, कान्हा बिन कछु सूझत नाहीं…

कित वे मुरली, कित कदम्ब की छैया…

Says Radha Rani to her companions, ‘Without Kanha, I am listless… Where is his flute, where is the shade of the Kadamb tree where he played upon the flute?’

कित वे पीत वसन, कित वे त्रिभंगी, नयन कछु ना दीखत सखी

Where are his yellow garments. Where is Krishna, who stands in a tribhangi pose. I don’t see him. More...

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 42 of 144

४२.

मोरपखा गल गुंज की माल किये बर बेष बड़ी छबि छाई।

पीत पटी दुपटी कटि में लपटी लकुटी ‘हटी’ मो मन भाई॥

छूटीं लटैं डुलैं कुण्डल कान, बजै मुरली धुनि मन्द सुहाई।

कोटिन काम ग़ुलाम भये जब कान्ह ह्वै भानु लली बन आई॥

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 41 of 144

४१.

अन्त रहौ किधौं अन्तर हौ दृग फारे फिरौं कि अभागिन भीरूं।

आगि जरौं या कि पानी परौं, अहओ कैसी करौं धरौं का विधि धीरूं॥

जो ‘घनआनन्द’ ऐसौ रूची, तो कहा बस हे अहो प्राणन पीरूं।

पाऊं कहां हरि हाय तुम्हें, धरनी में धंसूं कि अकाशहिं चीरूं॥

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 40 of 144

४०.

संकर से मुनि जाहि रटैं चतुरानन चारों ही आनन गावैं।

जो हिय नेक ही आवत ही मति मूढ़ महा ‘रसखान’ कहावैं॥

जापर देवी ओ देब निह्हरत बारत प्राण न वेर लगावैं।

ताहि अहीर की छोहर्या छछिया भर छाछ पै नाच नचावैं॥

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 38 of 144, Prayer to Krishna

३८.

ऐसी करा नव लाल रंगीले जू चित्त न और कहूं ललचाई।

जो सुख दुख रहे लगि देहसों ते मिट जायं आलोक बड़ाई॥

मागति साधु वृन्दाबन बास सदा गुण गानन मांहि विहाई।

कंज पगों में तिहारे बसौं नित देहु यहै ‘ध्रुय’ को ध्रुवताई॥

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 39 of 144

३९.

योगिया ध्यान धरैं जिनको, तपसी तन गारि के खाक रमावै।

चारों ही वेद ना पावत भेद, बड़े तिर्वेदी नहीं गति पावैं॥

स्वर्ग औ मृत्यु पतालहू मे जाको नाम लिये ते सवै सिर नावैं।

चरनदास कहै, तेहि गोपसुता, कर माखन दै दै के नाच नचावैं॥

Sawaiya poetry from vrindavan is in Brajbhasha and is used beautifully in raslilas.

Hindi bhajan lyrics, Daya karo to abhi hi kar do

दया करो तो अभी ही कर दो, हे नाथ फिर कब दया करोगे?

सुनाई होगी ना नाथ जब तक, पुकार यूं ही सुना करोगे

१. अगर तुम्हारी दया ना होगी, तो नाथ मेरी गुज़र ना होगी; ख़ता है मेरी ज़रूर लाखों, हे नाथ तुम ही क्षमा करोगे

२. भंवर के बस में पड़ी है नैया, सहारा देखूं तुम्हारा कब तक; करो किनारे पे जल्दी आकर, हुई जो देरी तो क्या करोगे

३. सुना है हम अंश हैं तुम्हारे, तुम्हीं हो सच्चे प्रभु हमारे; पसारो भुज को, उबारो मुझ को, जनम जन्म से हूं मैं फंसाया

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