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अम्मा मेरे बाबा को भेजो री, के सावन आया

अम्मा मेरे बाबा को भेजो री, के सावन आया,

बेटी तेरा बाबा तो बूढ़ा री, के सावन आया,

अम्मा मेरे भैया को भेजो री, के सावन आया,

बेटी तेरा भैया तो बाला री, के सावन आया |

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नन्ही नन्ही बूंदे रे, सावन का मेरा झूलना,

एक झूला डाला मैंने अम्मा जी के राज में,

एक झूला डाला मैंने बाबाजी के राज में,

हरी हरी मेहंदी रे, सावन का मेरा झूलना,

हरी हरी चुनरी रे, सावन का मेरा झूलना|

This is a medley of Kajari/Savan folk songs sung by women in Uttar Pradesh in Bihar in India. It is sung here by Padmashree Malini Awasthi ji.

Kajari folk song from Mirzapur by Malini Awasthi with lyrics

A Kajari song from Mirzapur by Malini Awasthi. It is sung in the rainy season, especially on Kajali Teej festival at Vindhyavasini Devi temple, Mirzapur, Uttar Pradesh, India.

अरे रामा सावन मा घनघोर बदरिया छाई रे हारी

घन उमड़ घुमड़ के छाये, उत कजारे घन छाये रे रामा

अरे रामा झींगुर की छनकारि, पिया को लागे प्यारी रे हारी

झूला पड़ा कदम की डारि, झूलें ब्रिज के नर नारि

अरे रामा पेंग बढ़ावे राधा प्यारी, पिया को लागे प्यारी रे हारी

अरे रामा सावन मा घनघोर बदरिया छाई रे हारी

बदरिया छाई रे हारी

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