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Master Saleem’s sufi song, Aj hona deedaar maahi da with lyrics

नी आवो सैयों रल देयो बधाइयां, मेरा पीर मेरे घर आया

असमान दा तारा मेरी झोली डिगेया, मेरे रब ने सबब बनाया

अज होणा दीदार माही दा, अज होणा दीदार…

अज माही ने औणा ए औणा, अज माही ने औणा

अज होणा दीदार माही दा, अज होणा दीदार…

अज हवांवा मिठ्ठियां वगना, अज धरती ने दुल्हन सजना

करना हार श्रंगार माही दा More...

Surdas bhajan lyrics, Sabse oonchi prem sagaai

सबसे ऊंची प्रेम सगाई

१. दुर्योधन के मेवा त्याग्यो, साग विदुर घर खाई

४. जूठे फल शबरी के खाये, बहु विधि स्वाद बताई

३. राजसूय यज्ञ युधिष्ठिर कीन्हा, तामे जूठ उठाई

५. प्रेम के बस पारथ रथ हांक्यो, भूल गये ठकुराई

६. ऐसी प्रीत बढ़ी वृन्दावन, गोपियन नाच नचाई

२. प्रेम के बस नृप सेवा कीन्हीं, आप बने हरि नाई

७. सूर क्रूर एहि लायक नाहीं, केहि लगो करहुं बड़ाई

Surdas was one of the Ashtsakha (8 friends of Krishna), appointed by Mahaprabhu Vallabhacharya ji to perform Raga seva to Sri Govardhan Nath ji (the Krishna deity, uncovered by Mahaprabhu ji on Govardhan Hill near Vrindavan, Mathura.

Pandit Jasraj sings Sab se oonchi prem sagaai

Pandit Jasraj, Raga Gurjari Todi – चलो सखी सौतन के घर ज‍इहें

चलो सखी सौतन के घर ज‍इहें

मान घटे तो का घट ज‍इहे, पी के दर्सन प‍इहें

ये जोवन अंजुरी को पानी, समो गये पछ्तैये

प्रभु दरश परस कर मन की तपत बुझ‍इहें

चलो सखी सौतन के घर ज‍इहें

मान घटे तो का घट ज‍इहे, पी के दर्सन प‍इहें

Krishna bhajan, Darshan do ghanshyam, Narsi Mehta

A beautiful Krishna bhajan from movie Narsi Bhagat (1957), sung by Hemant Kumar, Sudha Malhotra and Manna Dey. Music is by Ravi.

Narsi Mehta’s favourite raga was Kedar, which he used to communicate with Krishna.

Lyrics

दर्शन दो घनश्याम, नाथ मोरी अंखियां प्यासी रे

मन मंदिर की ज्योति जगा दो घट घट वासी रे

दर्शन दो घनश्याम, नाथ मोरी अंखियां प्यासी रे

मंदिर मंदिर मूरत तेरी

फिर भी ना दीखे सूरत तेरी

युग बीते, ना आई मिलन की पूरनमासी रे

दर्शन दो घनश्याम, नाथ मोरी अंखियां प्यासी रे

द्वार दया का जब तू खोले

पंचम स्वर में गूंगा बोले

अंधा देखे, लंगड़ा चल कर पंहुचे काशी रे

दर्शन दो घनश्याम, नाथ मोरी अंखियां प्यासी रे

पानी पी कर प्यास बुझाऊं

नैनों को कैसे समझाऊं

आंख मिचौली छोड़ो अब तो

मन के वासी रे

दर्शन दो घनश्याम, नाथ मोरी अंखियां प्यासी रे

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