Anandway: Blog

Roadmaps to joy!

Surdas bhajan lyrics, Sabse oonchi prem sagaai

सबसे ऊंची प्रेम सगाई

१. दुर्योधन के मेवा त्याग्यो, साग विदुर घर खाई

४. जूठे फल शबरी के खाये, बहु विधि स्वाद बताई

३. राजसूय यज्ञ युधिष्ठिर कीन्हा, तामे जूठ उठाई

५. प्रेम के बस पारथ रथ हांक्यो, भूल गये ठकुराई

६. ऐसी प्रीत बढ़ी वृन्दावन, गोपियन नाच नचाई

२. प्रेम के बस नृप सेवा कीन्हीं, आप बने हरि नाई

७. सूर क्रूर एहि लायक नाहीं, केहि लगो करहुं बड़ाई

Surdas was one of the Ashtsakha (8 friends of Krishna), appointed by Mahaprabhu Vallabhacharya ji to perform Raga seva to Sri Govardhan Nath ji (the Krishna deity, uncovered by Mahaprabhu ji on Govardhan Hill near Vrindavan, Mathura.

Pandit Jasraj sings Sab se oonchi prem sagaai

Hindi bhajan lyrics, Radhe ka naam hai anmol

राधे का नाम है अनमोल, रटे जा राधे राधे

१. गैया भी बोले राधे, बछड़े भी बोले राधे, दूध की धार से आवाज़ आये राधे राधे

२. गोकुल में राधे राधे, मथुरा में राधे राधे, वृन्दावन रजकण से आवाज़ आये राधे राधे

३. गोपी भी बोले राधे, ग्वाले भी बोलें राधे, कान्हा की बंसी से आवाज़ आये राधे राधे

४. गंगा भी बोले राधे, सरजू भी बोले राधे, यमुना की लहरों से आवाज़ आये राधे राधे

५. भक्त भी बोलें राधे, संत भी बोलें राधे, सांसों की तार से आवाज़ आये राधे राधे

६. ढ़ोलक भी बोले राधे, झांझर भी बोले राधे, हृदय के भीतर से आवाज़ आये राधे राधे

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 29 of 144, Maharaas in Vrindavan

२९.

मण्डल रास बिलास महा रसमण्डल श्री वृषभान दुलारी।

पंडित कोक चला गुण मण्डित कोटिक राजत गोपकुमारी॥

प्रीतम के भुज दण्ड में शोभित संग में अंग अनंगन वारी।

तान तरंगन रंग बढ़्यो, ऐसे राधिका माधव की बलिहारी॥

God is always in union (Maharaas) with creation, though we don’t always realize it. This sawaiya verse by a Braj poet, depicts the episode when God came as Sri Radha and Krishna - to love and be loved.

Gopis of Vrindavan had prayed to Ma Katyayani on the banks of River Yamuna (Yamuna ji is also Krishna’s wife and she is a symbol of love, a giver of devotion to Krishna.) The prayer was to have Krishna as their master/caretaker/husband. God is already everyone’s caretaker and master. More...

Sri Banke Bihari ke sawaiya, 28 of 144

२८.

बैठी हती गुरु लोगन में मन ते मनमोहन को न विसारति।

त्यों नन्दलाल जू आय गये बन ते सिर मोरन पंख संवारत॥

लाज ते पीठ दै बैठि बहू, पति मातु की आंख ते आंखिन टारति।

सासु की नैंन की पूतरी में निज प्रीतम को प्रतिबिम्ब निहारति॥

This sawaiya verse says:

A Gopi is sitting amidst family elders, and is thinking of Krishna. Just then Krishna arrives from the jungle, with a peacock feather tucked in his hair.

The Gopi feels shy and turns her back to Krishna, while looking into her mother-in-law’s eyes to catch his reflection there.

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 25 of 144

२५.
तेरी न चेरी न तेरे ददा की, न कोल्हूं में डारि पेराइ देवै हों।
खैचत हौ अंचरा गहि कै, फटि हे चुनरी कमरी दे के जै हों॥
टूटेंगे हार हमेल हजार  तौ नन्द जसोदा समेत बिकै हों।
राजी चहौ दधि खाओ भला वरि आई लला एक बूंद न पैहों॥

Krishna bhajan from Vrindavan, tum ho nandlal janam ke kapati

तुम हो नंदलाल जनम के कपटी

औरों की गागर नित उठ भरते, मेरी मटकी मझधार में पटकी

तुम हो नंदलाल जनम के कपटी

औरों का माखन नित उठ खाते, मेरो माखन अधरन बिच अटक्यो More...

Krishna bhajan, Ikli ban me gheri aan, Shyam tane kaisi thhani re

इकली बन में घेरी आन, श्याम तने कैसी ठानी रे

श्याम मोहे बृन्दाबन जानो रे, लौट के बरसाने आनो रे

जो होई देर अबेर, लड़े घर सास-जिठानी रे More...

Tag Cloud