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Swami Sri Haridas’s Ashtadash Sidhant, Verse 3, An ode to Sri Banke Bihari

श्री कुंजविहारिणे नमः

॥राग विभास॥

कबहूं कबहूं मन इत उत जात याते अब कौन अधिक सुख।

बहुत भांतिन घत आनि राख्यो नाहिंतौ पावतौ दुःख॥

कोटि काम लावण्य बिहारी ताके, मुंहाचुहीं सब सुख लिये रहत रुख।

श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी कों, दिन देखत रहौ विचित्र मुख॥

Sri Haridas ji says, ‘Many times the mind gets distracted but there is no pleasure in that. I bring it back to my center, else this mind would make me very unhappy. Sri Banke Bihari’s divine beauty is so enticing and the greatest of pleasures. With wonder and adoration I look at my masters Sri Radha Rani and Sri Krishna.’

Swami Sri Haridas’s Ashtadash Sidhant, Verse 2

श्री कुंजविहारिणे नमः

॥ राग विभास ॥

काहू को वश नाहि, तुम्हारी कृपा ते सब होई, बिहारी बिहारिनि।

और मिथ्या प्रपंच काहे को भाषिये, सोतौ है हारिनि॥

जाहि तुमसों हित तासों तुम हित करौ, सब सुख कारिनी।

श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी, प्राननि के आधारिनी॥२॥

Sri Haridas ji says, ‘Sri Krishna and Radha Rani, it is by your grace alone that everything gets done. It is pointless to discuss the complex cause and effects that are apparent, but not true. Whoever feels connected to you, you take care of them. You are my life.’

Sri Haridas’s song, Ashtadash Sidhant, Verse 1

श्री कुंजविहारिणे नमः

॥राग विभास॥

ज्योंही ज्योंही तुम राखत हौं, त्योंही त्योंही रहियत है हो हरि।

और तौ अचरचे पाई धरौ, सो तौ कहो कौन के पैड़ भरि॥

यद्यपि कीयो चाहौ अपनो मन भायौ, सौ तौ क्यौं करि सकौ ज्यों तुम राख्यौ पकरि।

कहें श्रीहरिदास पिंजरा को जनावर ज्यौं, फड़फड़ाय रह्यौ उड़िवे कों कितो‍ऊ करि॥१॥

Sri Haridas says to Sri Banke Bihari, ‘Hari, I live according to your wishes just as a caged animal cannot escape, no matter how much he wants to flee.’ Haridas ji surrenders to the Lord, saying, ‘I carry out your will alone. I have no personal wish other than your will. Just as a caged animal is at the mercy of its master, I am at your mercy and can do nothing without your will. You are my master, Hari.’

 

Radha Krishna aarti video and lyrics from Rangeeli Mahal, Barsana

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

दुहुन सिर कनक मुकुट छलके

दुहुन श्रुति कुण्डल भल हलके

दुहुन दृग प्रेम सुधा छलके

चसीले बैन, रसीले नैन, गसीले सैन

दुहुन मैनन मनहारी की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

दुहुनि दृग चितवनि पर वारी

दुहुनि लट लटिकनि छवि न्यारी

दुहुनि भौं मटकनि अति प्यारी

रसन मुख पान, हंसन मुस्कान, दसन दमकान

दुहुनि बेसर छवि न्यारी की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

एक उर पीतांबर फहरे, एक उर नीलांबर लहरे

दुहुन उर लर मोतिन छहरे

कनकानन कनक, किंकिनी झनक, नुपुरन भनक

दुहुन रुन झुन धुनि प्यारी की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

एक सिर मोर मुकुट राजे

एक सिर चूनर छवि साजे

दुहुन सिर तिरछे भल भ्राजे

संग ब्रजबाल, लाडली लाल, बांह गल डाल

‘कृपालु’ दुहुन दृग चारि की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 42 of 144

४२.

मोरपखा गल गुंज की माल किये बर बेष बड़ी छबि छाई।

पीत पटी दुपटी कटि में लपटी लकुटी ‘हटी’ मो मन भाई॥

छूटीं लटैं डुलैं कुण्डल कान, बजै मुरली धुनि मन्द सुहाई।

कोटिन काम ग़ुलाम भये जब कान्ह ह्वै भानु लली बन आई॥

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 37 of 144

३७.

चैन नहीं दिन रैन परै जब ते तुम नयनन नेक निहारे।

काज बिसार दिये घर के व्रजराज! मैं लाज समाज विसारे॥

मो विनती मनमोहन मानियो मोसों कबू जिन हूजियो न्यारे।

मोहि सदा चितसों अनि चाहियो नीके कै नेह निबाहियो प्यारे॥

Sawaiya verses from Vrindavan are an expression of devotion to Sri Radha Krishna.

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 36 of 144, राधिका जू प्रगटी जब ते तब ते तुम केलि कलानिधि पाई

३६.

सूकर ह्वै कब रास रच्यो अरु बावन ह्वै कब गोपी नचाईं।

मीन ह्वै कोन के चीर हरे कछुआ बनि के कब बीन बजाई॥

ह्वै नरसिंह कहो हरि जू तुम कोन की छातन रेख लगाई।

राधिका जू प्रगटी जब ते तब ते तुम केलि कलानिधि पाई॥

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