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Swami Sri Hariadas’s Ashtadash Sidhant, Verse 4, Raga Vibhas

श्री कुंजविहारिणे नमः

॥राग विभास॥

हरि भज हरि भज, छांडि न मान नर तन कौ।

मति वंछै मति वंछै रे, तिल तिल धन कौ।

अन मांग्यौ आगै आवेंगो, ज्यों पल पल लागै पल कौ।

कहें श्री हरिदास मीच ज्यों आवे, ज्यों धन है आपन कौ॥४॥

Swami Sri Haridas’s Ashtadash Sidhant, Verse 3, An ode to Sri Banke Bihari

श्री कुंजविहारिणे नमः

॥राग विभास॥

कबहूं कबहूं मन इत उत जात याते अब कौन अधिक सुख।

बहुत भांतिन घत आनि राख्यो नाहिंतौ पावतौ दुःख॥

कोटि काम लावण्य बिहारी ताके, मुंहाचुहीं सब सुख लिये रहत रुख।

श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी कों, दिन देखत रहौ विचित्र मुख॥

Sri Haridas ji says, ‘Many times the mind gets distracted but there is no pleasure in that. I bring it back to my center, else this mind would make me very unhappy. Sri Banke Bihari’s divine beauty is so enticing and the greatest of pleasures. With wonder and adoration I look at my masters Sri Radha Rani and Sri Krishna.’

Swami Sri Haridas’s Ashtadash Sidhant, Verse 2

श्री कुंजविहारिणे नमः

॥ राग विभास ॥

काहू को वश नाहि, तुम्हारी कृपा ते सब होई, बिहारी बिहारिनि।

और मिथ्य��� प्रपंच काहे को भाषिये, सोतौ है हारिनि॥

जाहि तुमसों हित तासों तुम हित करौ, सब सुख कारिनी।

श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी, प्राननि के आधारिनी॥२॥

Sri Haridas ji says, ‘Sri Krishna and Radha Rani, it is by your grace alone that everything gets done. It is pointless to discuss the complex cause and effects that are apparent, but not true. Whoever feels connected to you, you take care of them. You are my life.’

Radha Krishna aarti video and lyrics from Rangeeli Mahal, Barsana

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

दुहुन सिर कनक मुकुट छलके

दुहुन श्रुति कुण्डल भल हलके

दुहुन दृग प्रेम सुधा छलके

चसीले बैन, रसीले नैन, गसीले सैन

दुहुन मैनन मनहारी की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

दुहुनि दृग चितवनि पर वारी

दुहुनि लट लटिकनि छवि न्यारी

दुहुनि भौं मटकनि अति प्यारी

रसन मुख पान, हंसन मुस्कान, दसन दमकान

दुहुनि बेसर छवि न्यारी की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

एक उर पीतांबर फहरे, एक उर नीलांबर लहरे

दुहुन उर लर मोतिन छहरे

कनकानन कनक, किंकिनी झनक, नुपुरन भनक

दुहुन रुन झुन धुनि प्यारी की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

एक सिर मोर मुकुट राजे

एक सिर चूनर छवि साजे

दुहुन सिर तिरछे भल भ्राजे

संग ब्रजबाल, लाडली लाल, बांह गल डाल

‘कृपालु’ दुहुन दृग चारि की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 43 of 144, Virah bhaav

Krishna and Meera, Braj ke sawaiya

४३.

मनमोहन सों बिछुरी जबसों तन आँसुन सौ सदा धोवती हैं।

‘हरिचन्द’ जू प्रेम के फन्द परी कुल की कुललाजहिं खोवती हैं॥

दुख के दिन को काहू भाँति बितै विरहागिन रैन संजोवती हैं।

हम ही अपनी दशा जाने सखी निसि सोवती हैं किधौं रोवती हैं॥

More sawaiya verses in Braj bhasha

Guru bhajan by Surdas, Druhn in charnan kero bharoso

दृढ़ इन चरनन केरो भरोसो, दृढ़ इन चरनन केरो

श्री वल्लभ नख चन्द्र छटा बिन, सब जग मांझ अंधेरो

साधन और नहीं या कलि में, जासो होत निबेरो

सूर कहा कहे दुविध आंधरो, बिना मोल को चेरो

Surdas and SrinathjiSurdas wrote this bhajan in Braj bhasha for his Guru, Mahaprabhu Vallabhacharya. Surdas was a blind poet and musician, one of the Asht sakhas of Sri Govardhan Nath ji (now at Nathdwara, near Udaipur) who was at Govardhan hill (near Vrindavan) during Surdas’s lifetime. Suradas breathed his last in Braj. This song speaks of his faith in the Guru and his teachings.

Khanjan Nayan is a beautiful biography of Surdas by Amrit Lal Nagar, a famous writer from Chowk in Lucknow.

A bhajan video: Surdas

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 42 of 144

४२.

मोरपखा गल गुंज की माल किये बर बेष बड़ी छबि छाई।

पीत पटी दुपटी कटि में लपटी लकुटी ‘हटी’ मो मन भाई॥

छूटीं लटैं डुलैं कुण्डल कान, बजै मुरली धुनि मन्द सुहाई।

कोटिन काम ग़ुलाम भये जब कान्ह ह्वै भानु लली बन आई॥

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