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Holi rasiya from Vrindavan, bahut dinan se roothe shyam ko holi me

Holi song from Vrindavan, Sri Banke Bihari, bahut dinan se mai roothe shyam ko holi me mana laungi

बहुत दिनन से मैं रूठे श्याम को

होली में मना लाउंगी

मना लाउंगी…

वृन्दावन की कुंज गलिन से

गोदी में उठा लाउंगी

मना लाउंगी…

बहुत दिनन से मैं रूठे श्याम को

होली में मना लाउंगी

मना लाउंगी…

अपने आंगन फाग रचा के

भव से उतर जाउंगी

मना लाउंगी…

बहुत दिनन से मैं रूठे श्याम को

होली में मना लाउंगी

मना लाउंगी…

More Holi songs

Holi is a festival of colour-play in India. In Vrindavan, it has a special significance. The idea is to soak in the colours of divinity/divine love :-) Happy Holi from Vrindavan…

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 20 of 144

A sawaiya verse by Raskhan

Krishna painting

२०.
ए सजनी वह नन्द को साँवरो, या बन धेनु चराय गयो है ।
मोहन तानन गोधन गाय के वेणु बजाय रिझाय गयो है ॥
ताही घरी कछु टोना सो कै, ‘रसखानि’ हिये में समाय गयो है ।
को‍ऊ न काहू की कानि करै, सिगरो ब्रज बीर बिकाय गयो है ॥

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Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 18 of 144

१८.
राधिका कान्ह को ध्यान धरैं, तब कान्ह ह्वै राधिका के गुण गावैं ।
त्यों अँसुवा बरसैं बरसाने को पाती लिखैं लिखि राधे को ध्यावैं ॥
राधे ह्वै जायँ घरीक में ‘देव’ सु प्रेम की पाती लै छाती लगावैं ।
आपने आप ही में उरझैं सुरझैं , उरझैं, समुझैं समुझावैं ॥

This Braj sawaiya verse by poet Prem, says:

Radhika in her love for Krishna, begins to feel as Krishna and longs for Radhika. Tears of longing for Radha fill her eyes and she writes a letter for her and sends it to Barsana. Then quickly comes back to being Radhika and takes the letter and embraces it, close to her heart. The poet Prem says, this is how she engages in her love for Krishna. She meditates on him and becomes one with Him :-) and doesn’t know the difference between herself and Krishna when she thinks of Him.

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Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 17 of 144

१७.
कौन ठगौरी करी हरि आज बजाय के बाँसुरिया रँग भीनी ।
कान परी जिनके जिनके तिनकीं कुल लाज बिदा करि दीनी ॥
घूमैं घरी-घरी नंद के द्वार नवीनी कहा कहूँ वाल प्रवीनी ।
या ब्रजमण्डल में ‘रसखानि’ सो कौन भटू जो लटू नहिं कीनी ॥

Raskhan says in this sawaiya verse:

Hari is playing a mystic and charming tune on his flute. Whoever hears it comes looking for Him. He has charmed and attracted all Brajwasis. None is exempt.

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Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 15 of 144

Sri Bnake Bihari ke sawaiya, dohe१५.
काहे को वैद बुलावत हो, मोहि रोग लगाय के नारि गहो रे ।
हे मधुहा मधुरी मुसकान निहारे बिना, कहो कैसो जियो रे ॥
चन्दन लाय कपूर मिलाय, गुलाब छिपाय दुराय धरो रे ।
और इलाज कछू न बनै, ब्रजराज मिलैं सो इलाज करो रे ॥

This sawaiya verse from Vraj says:

Why do you call a physician to take care of my illness? How can I live without seeing the sweet smile of Krishna? You are taking trouble to mix herbs for medicine; sandalwood, rose and camphor… No treatment other than the meeting of Krishna will help me recover.

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Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 14 of 144

१४.
मेरो स्वभाव चितैवे को माई री, लाल निहारि कै बंसी बजाई ।
बा दिन सों मोहिं लागो ठगौरी सी लोग कहैं लखि बाबरी आई ॥
यों ‘रसखानि’ घिरी सिगरो ब्रज जानत है जिय की जियराई ।
जो कोऊ चाहै भली अपनो, तो सनेह न काहूसों कीजियो माई ॥

In this sawaiya verse, Bhakti-poet Raskhan says:

When I heard the flute of Krishna, I lost consciousness of the world. People think I have gone crazy. Let me tell you this from experience, do not fall in love with anybody :-)

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Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 13 of 144

radha krishna, Banke bihari ke sawaiya

१३.
आपकी ओर की चाहैं लिखी, लिखि जात कथा उत मोहन ओर की ।
प्यारी दया करि वेगि मिलो, सहिजात व्यथा नहि मैंनमरोर की ॥
आपुहिं बाँचत अंग लगाबति, है किन आनी चिठी चितचोर की ।
राधिका मौन रही धरि ध्यान सो, है गई मूरति नन्दकिसोर की ॥

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