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Roadmaps to joy!

Holi song, Guru bhajan, Holi khel rahe hai Guruvar apne Hari bhakto ke sang

होरी खेल रहे हैं गुरुवर, अपने हरि भक्तों के संग,

हरि भक्तों के संग, अपने हरि भक्तों के संग

१. खेल रही हैं होरी, कर कर के हुड़दंग

गुरु हमारे खेलें होरी, करते रहें सत्संग

२. धर्म के कर में हो पिचकारी, भर विवेक का रंग

जिसके हृदय लगे ये निशाना, वह रह जाये दंग

३. ज्ञान गुलाल मलत मुख ऊपर, प्रेम का भर क रंग

पिया है जिसने वही हुआ है सदगुरु के … संग

४. कान्हा खेल रहे हैं होरी राधाजी के संग

सीता के संग रघुवर खेलें, भीजत हैं सब अंग

Meera Bai bhajan, Barase Badariya Saavan ki

बरसे बदरिया सावन की, सावन की मनभावन की,

१. सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनि हरि आवन की

बरसे बदरिया सावन की…

२. नन्हीं नन्हीं बूंद सुहावन लागत, बूंदन की झर लावन की

बरसे बदरिया सावन की

३. दादुर, मोर, पपीहा बोले, कोयल शबद सुनावन की

बरसे बदरिया सावन की

४. मीरा के प्रभु हरि अविनाशी, आनंद मंगल गावन की,

बरसे बदरिया सावन की

Meera Bai sings a song: In the rainy season (Saavan), I am happy and excited. I hear that my Lord is coming. Raindrops looks lovely. Frogs, Papiha bird and cuckoos also voice their happiness in the rainy season. My Lord is the eternal Lord, Hari. This is the time to sing in bliss.

Divine game

Q: Guruji, it is true that God is present every moment but why do we feel sometimes separation or duality?

Sri Sri Ravi Shankar: That’s a game!

Devotion is your nature

Devotion is abiding in your own nature; like the sweetness cannot leave sugar, the coolness cannot leave ice; the nature to flow does not leave water right! Similarly devotion is your nature it won’t leave you.

~ Sri Sri Ravi Shankar

Ye To Prem Ki Baat Hai Udhau, bhajan by Mridul Krishna Shastri of Vrindavan

Bhajan Lyrics

ये तो प्रेम की बात है ऊद्धव, बंदगी तेरे बस की नहीं है

यहां सर दे के होते हैं सौदे, आशिकी इतनी सस्ती नहीं है

प्रेम वालों ने कब वक्त पूछा

उनकी पूजा में, सुन ले ऐ उद्धव

यहां दम दम में होती है पूजा

सर झुकाने की फुर्सत नहीं है More...

Sri Banke Bihari ji ke sawaiye, 32 of 144, A search for nirgun and sagun Brahman

३२.

ब्रह्म में ढूंढ्यो पुरानन वेदन भैद सुन्यो चित चौगुने चायन।

देख्यो सुन्यो न कहूं कबहूं वह कैसे स्वरूप औ कैसे सुभायन॥

ढूंढत ढूंढत हारि परयो ‘रसखानि’ बतायो न लोग लुगायन।

देख्यो कहां वह कुंज कुटीर में बैठो पलोटन राधिका पायन॥

This sawaiya verse illustrates poet Raskhan’s search for nirgun and sagun Brahman.

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