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Roadmaps to joy!

Radha Krishna lila, Sri Banke Bihari ke sawaiya, 50 of 144

५०.

हेलो री मैं लख्यो आजु को खेल बखान कहां लौ करे मत मोरी।

राधे के सीस पै मोर पखा मुरली लकुटी कटि में पट डोरी॥

बेनी विराजत लाल के भाल ओ चूनर रंग कसूम में बोरी।

मान के मोहन बैठि रहे सो मनावति श्री वृषभान किसोरी॥५०॥

Swami Sri Haridas’s Ashtadas Sidhant, Verse 6, Ragani Aasavari

॥ रागनी आसावरी ॥

वंदे अख्त्यार भला।

चित न डुलाव आव समाधि भीतर न हो‍हु अगला॥

न फिर दर दर पिदर दर न होअहु अंधला।

कहें श्री हरिदास करता कीया सो हुआ सुमेरू अचल चला॥६॥

Sri Haridas

Braj ke dohe, sawaiya, 46 of 144

४६.

विछुरे पिय के जग सूनो भयो, अब का करिये कहि पेखिये का।

सुख छांडि के दर्शन को तुम्हरे इन तुच्छन को अब लेखिये का॥

‘हरिचन्द’ जो हीरन को ब्यवहार इन कांचन को लै परेखिये का।

जिन आंखिन में वह रूप बस्यो उन आंखन सों अब देखिये का॥४६॥

A Krishna devotee-poet of Vrindavan, Harichand says: When my beloved Lord is not visible, the world looks empty…now what is there to do or see? After seeing your bliss-giving presence, nothing else is more worthy of been seen.

After wearing diamonds, what is the point of inspecting pieces of glass?

The eyes which are blessed with your sight, have no need to see anything else anymore :-)

Swami Haridas’s Ashtadash Sidhant, Verse 5, Raga Vilaaval

श्री कुंजविहारिणे नमः

॥ राग विलावल ॥

ए हरि! मोसौ न विगारन कौ, तोसो न संभारन कौ, मोहि तोहि परी होड़।

कौनधौ जीते कौनधौ हारें, पर बदी न छोड़॥

तुम्हारी माया बाजी विचित्र पसारी, मोहे मुनि सुनि भुले काके कोड़।

कहें श्री हरिदास हम जीते, हारे तुम, तो‍उ न तोड़॥५॥

Sri Haridas says, ‘O, Hari, I am competing with you. There is none who can mess up things more than me, and there is none who can make things alright as you can…. Even if I win, I am a loser in reality.’

Swami Sri Haridas’s Ashtadash Sidhant, Verse 3, An ode to Sri Banke Bihari

श्री कुंजविहारिणे नमः

॥राग विभास॥

कबहूं कबहूं मन इत उत जात याते अब कौन अधिक सुख।

बहुत भांतिन घत आनि राख्यो नाहिंतौ पावतौ दुःख॥

कोटि काम लावण्य बिहारी ताके, मुंहाचुहीं सब सुख लिये रहत रुख।

श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी कों, दिन देखत रहौ विचित्र मुख॥

Sri Haridas ji says, ‘Many times the mind gets distracted but there is no pleasure in that. I bring it back to my center, else this mind would make me very unhappy. Sri Banke Bihari’s divine beauty is so enticing and the greatest of pleasures. With wonder and adoration I look at my masters Sri Radha Rani and Sri Krishna.’

Swami Sri Haridas’s Ashtadash Sidhant, Verse 2

श्री कुंजविहारिणे नमः

॥ राग विभास ॥

काहू को वश नाहि, तुम्हारी कृपा ते सब होई, बिहारी बिहारिनि।

और मिथ्या प्रपंच काहे को भाषिये, सोतौ है हारिनि॥

जाहि तुमसों हित तासों तुम हित करौ, सब सुख कारिनी।

श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी, प्राननि के आधारिनी॥२॥

Sri Haridas ji says, ‘Sri Krishna and Radha Rani, it is by your grace alone that everything gets done. It is pointless to discuss the complex cause and effects that are apparent, but not true. Whoever feels connected to you, you take care of them. You are my life.’

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